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ईरान का बड़ा ऐलान अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो 10 लाख अतिरिक्त सैनिक तैयार! मध्य पूर्व में महासंग्राम के आसार!

On: March 27, 2026 5:08 AM
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ईरान का बड़ा ऐलान : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान पर जमीनी आक्रमण (Ground Invasion) करता है तो वह 10 लाख से अधिक अतिरिक्त लड़ाकों को мобилиज कर देगा। ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों के अनुसार, बसीज, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और नियमित सेना के भर्ती केंद्रों पर युवाओं की भारी भीड़ जुट रही है। ईरान इसे “अमेरिकियों के लिए ऐतिहासिक नर्क” बनाने की तैयारी बता रहा है।

यह घटनाक्रम 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष के बीच आया है। वर्तमान में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

ईरान का बड़ा ऐलान और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
ईरान का बड़ा ऐलान के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

ईरान का बड़ा ऐलान अमेरिका की सैन्य तैयारियां!

अमेरिका भी क्षेत्र में अपनी सेना मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • क्षेत्र में पहले से ही लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
  • 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने की तैयारी है।
  • पेंटागन दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स तैनात कर रहा है, जिसमें करीब 5,000 मरीन और नौसेना के हजारों कर्मी शामिल होंगे।
  • हजारों मरीन पहले से ही क्षेत्र में मौजूद हैं।

ये तैयारियां संभावित जमीनी कार्रवाई की आशंका को बढ़ा रही हैं, हालांकि अमेरिका ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

ईरान का दावा और भर्ती अभियान

ईरानी सैन्य सूत्रों ने Tasnim News Agency को बताया कि संभावित अमेरिकी जमीनी हमले की अफवाहों के बीच देशभर में भर्ती केंद्रों पर उत्साह है। बसीज मिलिशिया, IRGC और सेना के रिक्रूटमेंट सेंटर्स पर युवा बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसके पास पहले से ही मजबूत सेना है और 10 लाख अतिरिक्त लड़ाके किसी भी जमीनी आक्रमण का मुंह तोड़ जवाब देने को तैयार हैं।

#ईरान का फोकस खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर है, जहां वह दुश्मन के जहाजों को रोकने का पूरा अधिकार रखता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को भी सूचित किया है कि वह आत्मरक्षा में कोई भी कदम उठा सकता है।

ईरान ने अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव ठुकराया

  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
  • उन्होंने अमेरिका पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। अराघची ने कहा
  • कि अमेरिका एक तरफ गाजा में इजरायल की नाकेबंदी का समर्थन करता है
  • दूसरी तरफ होर्मुज में ईरान की आत्मरक्षा कार्रवाई की आलोचना करता है।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है
  • और न ही युद्ध समाप्त करने की कोई योजना है। यह बयान अमेरिकी दावों के विपरीत है
  • जिसमें बातचीत को सार्थक बताया जा रहा था।

पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान ने कहा है कि वह ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों से सक्रिय बातचीत कर रहा है। खास बात यह है कि अमेरिका ने अपनी मांगें ईरान तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तान का रास्ता इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान अब शांति प्रयासों में लगा हुआ है।

वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए चिंता

यह संघर्ष अगर बढ़ा तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का खतरा है, जो दुनिया के तेल निर्यात का करीब 20% हिस्सा है। इससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत, जो अपना बड़ा तेल आयात खाड़ी क्षेत्र से करता है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होगा। पहले ही पेट्रोल-डीजल और LPG पर असर दिखने लगा है।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की भौगोलिक स्थिति, पहाड़ी इलाके और बड़ा जनसंख्या आधार
  • किसी भी जमीनी आक्रमण को बेहद महंगा और लंबा बना सकता है।
  • इराक युद्ध (2003) की याद दिलाते हुए कुछ विश्लेषक कह रहे हैं
  • कि ईरान पर जमीनी हमले के लिए अमेरिका को 15 लाख से ज्यादा सैनिकों
  • की जरूरत पड़ सकती है, जो बेहद जोखिम भरा होगा।

आगे क्या हो सकता है?

  • अगर अमेरिका जमीनी कार्रवाई करता है तो ईरान पूर्ण युद्ध की तैयारी में है।
  • होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
  • परमाणु मुद्दा भी फिर से गरम हो सकता है, क्योंकि ईरान के कुछ सख्तपंथी परमाणु हथियार बनाने की मांग कर रहे हैं।
  • कूटनीतिक प्रयास (पाकिस्तान सहित) अभी भी जारी हैं, लेकिन दोनों पक्ष सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

निष्कर्ष: ईरान का 10 लाख अतिरिक्त सैनिकों को तैयार करने का दावा मध्य पूर्व में तनाव को नया आयाम दे रहा है। अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती और ईरान का सख्त रुख दोनों पक्षों को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है। फिलहाल स्थिति अत्यधिक संवेदनशील है और दुनिया की नजरें ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। अगर युद्ध बढ़ा तो इसका असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ेगा।

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