जयशंकर का बड़ा बयान : जयशंकर ने इजरायल के साथ भारत की गहरी दोस्ती को खुलकर स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने भारत को कई युद्धों के दौरान मदद की है और वह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण डिफेंस पार्टनर है। वहीं, ईरान संघर्ष के बीच भारत की चुप्पी को लेकर उठे सवालों का भी उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया। यह बयान सर्वदलीय बैठक में दिया गया, जहां विपक्षी सांसदों ने अमेरिका और इजरायल से रिश्तों का फायदा पूछा था।
जयशंकर का बड़ा बयान सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?
26 मार्च 2026 को हुई सर्वदलीय बैठक में एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने पूछा कि अमेरिका और इजरायल के साथ करीबी रिश्ते रखने से भारत को क्या फायदा हो रहा है, खासकर जब पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका-इजरायल) में युद्ध जैसे हालात हैं।
जयशंकर ने दोटूक जवाब देते हुए कहा: “इजरायल हमारा करीबी साझेदार है। उसने कई जंगों के दौरान हमारी मदद की है। वह रक्षा प्रौद्योगिकी (डिफेंस टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में बड़ा पार्टनर है। इसके जरिए हमें बड़ी मदद मिलती रही है।”

विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और हाई-एंड टेक्नोलॉजी का स्रोत है। इजरायल की मदद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सहायता विशेष रूप से पाकिस्तान से हुए युद्धों के समय मिली थी, हालांकि उन्होंने विस्तार से नहीं बताया।
यह पहला मौका है जब जयशंकर ने इजरायल की मदद को इतने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया।
ईरान पर भारत की चुप्पी की वजह
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर भारत की शुरुआती चुप्पी को लेकर भी सवाल उठे थे। जयशंकर ने कहा कि यह आरोप गलत हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने तुरंत ईरानी दूतावास जाकर शोक संदेश दर्ज किया और किताब पर हस्ताक्षर किए।
- उन्होंने आगे बताया कि ईरान के साथ भारत के संबंध अभी भी दोस्ताना बने हुए हैं।
- प्रमाण स्वरूप उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जहां से भारत का बड़ा तेल आयात होता है)
- से ईरान ने हमारे 4 जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी, जबकि दूसरे देशों के जहाज फंस गए थे।
- जयशंकर ने यह भी बताया कि सऊदी अरब और यूएई में ईरानी हमलों से भारत को चिंता थी
- क्योंकि वहां करीब 80 लाख भारतीय रहते हैं। हमारी प्राथमिकता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा थी।
भारत की विदेश नीति: बैलेंस्ड अप्रोच
- जयशंकर का बयान भारत की बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाता है।
- भारत न तो पूरी तरह इजरायल-अमेरिका के साथ है और न ही ईरान से दूरी बना रहा है।
- इजरायल से: रक्षा, तकनीक, खुफिया जानकारी और कृषि क्षेत्र में मजबूत सहयोग।
- ईरान से: ऊर्जा सुरक्षा (तेल आयात), चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय स्थिरता।
- अमेरिका से: व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारी।
विदेश मंत्री ने जोर दिया कि पश्चिम एशिया में तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और विदेश में रह रहे भारतीयों को प्रभावित कर रहा है। इसलिए सरकार हर पक्ष से बात कर रही है और संतुलित रुख अपनाए हुए है।
इजरायल-ईरान संघर्ष का भारत पर असर
वर्तमान संघर्ष से:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा है (दुनिया का 20% तेल यहां से गुजरता है)।
- ईंधन कीमतों में उछाल की आशंका।
- क्षेत्र में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा चिंता।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित।
भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जयशंकर दोनों इजरायल और ईरान के नेताओं से संपर्क में हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान साफ करता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता देता है। इजरायल जैसा मजबूत डिफेंस पार्टनर होने का फायदा कई युद्धों में देखा गया, वहीं ईरान के साथ दोस्ताना संबंध ऊर्जा और व्यापार के लिए जरूरी हैं।
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