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ईरान का बयान ईरान ने भारत की विदेश नीति की तारीफ की अमेरिका से संघर्ष के बीच क्या कहा? पूरी डिटेल!

On: March 26, 2026 4:56 AM
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ईरान का बयान : 26 मार्च 2026 को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान ने भारत की संतुलित विदेश नीति की सराहना की है। ईरान का कहना है कि भारत ग्लोबल साउथ का प्रमुख देश होने के नाते पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फताली ने स्पष्ट कहा कि भारत की बैलेंस्ड फॉरेन पॉलिसी इसे इस क्षेत्र में विश्वसनीय मध्यस्थ बना सकती है।

ईरान का बयान – क्या कहा राजदूत मोहम्मद फताली ने?

“भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ग्लोबल साउथ का प्रमुख देश होने और अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण भारत तनाव घटाने और संवाद को बढ़ावा देने में विशेष स्थान रखता है।”

ईरान का बयान युद्ध और वैश्विक तनाव पर
ईरान का बयान सामने आने के बाद बढ़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव

उन्होंने आगे जोड़ा:

“भारत का सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध है, जो गलतफहमियों को कम करने और कूटनीतिक रास्तों को मजबूत करने में इसे भरोसेमंद खिलाड़ी बनाता है।”

ईरान भारत को मित्र देश मानता है और मानता है कि भारत की तटस्थ लेकिन सक्रिय कूटनीति क्षेत्रीय शांति के लिए फायदेमंद हो सकती है।

पृष्ठभूमि: अमेरिका-ईरान संघर्ष क्यों बढ़ा?

  • पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।
  • ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इजराइल तथा खाड़ी अरब देशों पर हमले तेज कर दिए।
  • इस बीच भारत ने लगातार संवाद और डी-एस्केलेशन की वकालत की है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में जोर दिया
  • कि पश्चिम एशिया का युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी पक्षों को नुकसान हो रहा है।
  • सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा – “हम ब्रोकर नेशन नहीं हैं।
  • उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी खारिज किया।

भारत की विदेश नीति की ताकत

भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी खासियत उसका संतुलन है। भारत:

  • ईरान के साथ चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट चला रहा है
  • इजराइल के साथ डिफेंस और टेक्नोलॉजी सहयोग बढ़ा रहा है
  • अमेरिका के साथ QUAD और कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मजबूत कर रहा है
  • खाड़ी देशों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है

इसी बैलेंस्ड अप्रोच की वजह से ईरान जैसे देश भारत को विश्वसनीय मानते हैं। ईरान का बयान भारत की मल्टी-अलाइनमेंट नीति की सफलता को दर्शाता है – न किसी एक पक्ष में पूरी तरह झुकना, न किसी को पूरी तरह नजरअंदाज करना।

भारत-अमेरिका संबंधों में नई गति

इसी दौरान दिल्ली में 18वें भारत-अमेरिका डिफेंस पॉलिसी ग्रुप की बैठक हुई। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य उपकरण निर्माण और को-प्रोडक्शन पर चर्चा की। यह दिखाता है कि भारत अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है, लेकिन साथ ही ईरान जैसे देशों से भी संवाद बनाए रख रहा है।

वैश्विक प्रभाव और चुनौतियां

  • पश्चिम एशिया का यह संघर्ष ऊर्जा संकट, तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक
  • आपूर्ति श्रृंखला पर असर डाल रहा है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।
  • ईरान का भारत को सकारात्मक संदेश इस बात का संकेत है कि तेहरान भारत की
  • भूमिका को महत्व देता है। हालांकि भारत ने साफ किया है कि वह किसी की मध्यस्थता
  • नहीं कर रहा, बल्कि शांति और संवाद का समर्थन कर रहा है।

क्या है भारत के सामने चुनौती?

  • एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत संबंध
  • दूसरी तरफ ईरान से रणनीतिक हित (चाबहार, ऊर्जा)
  • इजराइल से सुरक्षा सहयोग
  • खाड़ी देशों से आर्थिक संबंध
  • भारत इन सभी को संतुलित रखते हुए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा कर रहा है।
  • जयशंकर का बयान “We are not broker nations” इसी नीति को रेखांकित करता है।

ईरान द्वारा भारत की विदेश नीति की सराहना करना भारत की कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है। जब अमेरिका-ईरान संघर्ष चरम पर है, तब भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति क्षेत्रीय शांति के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकती है।

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