ईरान युद्ध : पश्चिम एशिया में इरान-इजरायल (अमेरिका) युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से भारत में एलपीजी संकट गहरा गया है। भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें 80-90% हिस्सा होर्मुज मार्ग से गुजरता है। इस रूट के बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई और कीमतें बढ़ने लगीं। ऐसे में 20,000 किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका का देश अर्जेंटीना भारत के लिए बड़ी राहत बनकर उभरा है।
अर्जेंटीना ने संकट की इस घड़ी में भारत को 50,000 टन एलपीजी निर्यात कर बड़ी मदद दी है। यह मात्रा 2026 की पहली तिमाही में ही भेजी गई, जो पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुनी से भी ज्यादा है। संकट शुरू होने से पहले ही अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका बंदरगाह से 39,000 टन एलपीजी भारत पहुंच चुकी थी। 5 मार्च को एक और 11,000 टन का शिपमेंट रवाना किया गया। गौरतलब है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को कभी एलपीजी नहीं भेजी थी।

ईरान युद्ध अर्जेंटीना कैसे बना भारत का नया ऊर्जा पार्टनर?
अर्जेंटीना के पास प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कौसिनो ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उनकी राष्ट्रीय गैस और तेल कंपनी के अध्यक्ष ने पिछले साल भारत का दो बार दौरा किया और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी समेत कई बैठकें कीं।
भारत सरकार की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति की राजदूत ने खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अब 40 से ज्यादा देशों से ऊर्जा आपूर्ति का नेटवर्क बना रहा है, जिसमें अर्जेंटीना एक अहम कड़ी बन गया है। यह सहयोग अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन मौजूदा संकट इसे और मजबूत कर सकता है।
होर्मुज संकट का भारत पर असर
- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है।
- इसके प्रभावित होने से न सिर्फ एलपीजी, बल्कि कच्चे तेल और अन्य गैसों की सप्लाई भी प्रभावित हुई।
- भारत में घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं की संख्या 30 करोड़ से ज्यादा है।
- संकट के कारण व्यावसायिक एलपीजी (होटल, रेस्टोरेंट) पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।
- कई जगहों पर कीमतें बढ़ीं और सप्लाई में दबाव बढ़ा।
- सरकार ने तुरंत कदम उठाए। रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
- कमर्शियल एलपीजी कोटे में 20% बढ़ोतरी की गई। साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस
- (PNG) कनेक्शनों को तेजी से बढ़ाने का काम शुरू किया गया
- ताकि लोग एलपीजी से PNG की तरफ शिफ्ट हो सकें।
लंबी दूरी की चुनौतियां!
अर्जेंटीना से भारत तक एलपीजी भेजने में बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है। बाहिया ब्लांका से गुजरात के दाहेज बंदरगाह की दूरी करीब 20,000 किलोमीटर है। इतनी लंबी यात्रा से परिवहन लागत बढ़ जाती है, डिलीवरी में समय लगता है और मौसम संबंधी जोखिम भी रहते हैं। फिर भी संकट की स्थिति में यह विकल्प भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति
- यह संकट भारत को अपनी ऊर्जा निर्भरता पर दोबारा सोचने का मौका दे रहा है।
- सरकार अब अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से भी एलपीजी आयात
- की संभावनाएं तलाश रही है। घरेलू स्तर पर भी उत्पादन
- बढ़ाने और PNG नेटवर्क विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए ऊर्जा
- स्रोतों में विविधता लाना जरूरी है। अर्जेंटीना जैसे नए पार्टनर्स
- के साथ मजबूत संबंध बनाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
आम लोगों और उद्योग पर असर
एलपीजी संकट का सबसे ज्यादा असर घरेलू रसोई और होटल-रेस्तरां पर पड़ा। कुछ जगहों पर सिलेंडर की कीमतें बढ़ीं और ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी आईं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक क्षेत्र में सप्लाई को नियंत्रित किया। पीएनजी की तरफ शिफ्ट होने वाले उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने भारत की एलपीजी सप्लाई को चुनौती दी, लेकिन अर्जेंटीना जैसे दूर देशों का सहयोग इस संकट को कम करने में मददगार साबित हो रहा है। 50,000 टन एलपीजी की आपूर्ति सिर्फ एक शुरुआत है। भारत को अब लंबे समय के लिए मजबूत ऊर्जा कूटनीति अपनानी होगी।
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