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CJI सूर्यकांत बयान फैमिली कोर्ट में जज और वकील यूनिफॉर्म में क्यों न आएं? CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान!

On: March 17, 2026 5:10 AM
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CJI सूर्यकांत बयान : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने फैमिली कोर्ट को लेकर एक बड़ा और अहम सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि पारिवारिक अदालतों में जज और वकीलों को पारंपरिक काले-सफेद यूनिफॉर्म में नहीं आना चाहिए।

यह बयान न्याय व्यवस्था में एक मानवीय बदलाव की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य अदालत के माहौल को कम डरावना बनाना है, खासकर बच्चों के लिए।

CJI सूर्यकांत बयान फैमिली कोर्ट में यूनिफॉर्म न पहनने की सलाह
CJI सूर्यकांत का बयान: फैमिली कोर्ट में जज और वकील यूनिफॉर्म में न आएं

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा

#CJI सूर्यकांत ने कहा कि फैमिली कोर्ट में आने वाले लोगों, विशेष रूप से बच्चों के मन में अदालत का माहौल डर पैदा करता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या काले कपड़े (ब्लैक कोट) बच्चों के मन में मनोवैज्ञानिक डर नहीं पैदा करते?

उनका मानना है कि पारिवारिक अदालतों में जज और वकील यदि सामान्य कपड़ों में आएं, तो माहौल अधिक सहज और मानवीय बन सकता है।

क्यों जरूरी है यह बदलाव

  • फैमिली कोर्ट में ज्यादातर मामले पति-पत्नी के विवाद, तलाक, बच्चों की कस्टडी जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़े होते हैं।
  • ऐसे मामलों में बच्चे भी शामिल होते हैं, और उनके लिए कोर्ट का वातावरण मानसिक रूप से तनावपूर्ण हो सकता है।
  • CJI के अनुसार, अगर अदालत का माहौल कम डरावना होगा, तो बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य खुलकर अपनी बात रख पाएंगे।

बच्चों के मन से डर हटाना है उद्देश्य

  • CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि अदालतों को बच्चों के मन से “मनोवैज्ञानिक डर” हटाने की दिशा में काम करना चाहिए।
  • उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सिर्फ जज और वकील ही नहीं, बल्कि पुलिस
  • अधिकारी भी यूनिफॉर्म में न आएं, ताकि पूरा माहौल सामान्य और सुरक्षित लगे।
  • यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है, जिससे न्याय प्रणाली अधिक संवेदनशील और मानवीय बनेगी।

फैमिली कोर्ट को “समाधान केंद्र” बनाने की सोच

  • CJI ने यह भी सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट को सिर्फ विवाद सुलझाने की जगह नहीं
  • बल्कि “फैमिली सॉल्यूशन सेंटर” के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
  • इसका उद्देश्य सिर्फ कानूनी फैसला देना नहीं, बल्कि परिवारों के बीच
  • संबंधों को बेहतर बनाना और समझौते को बढ़ावा देना है।

न्याय व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण

  • CJI का यह बयान दिखाता है कि अब न्याय व्यवस्था में केवल कानून ही नहीं
  • बल्कि भावनाओं और मानवीय पहलुओं को भी महत्व दिया जा रहा है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील
  • और लोगों के करीब बनाने में मदद करेगा।

क्या इससे बदलेगा कोर्ट का माहौल?

अगर इस सुझाव को लागू किया जाता है, तो फैमिली कोर्ट का माहौल पूरी तरह बदल सकता है।

  • अदालत कम डरावनी लगेगी
  • बच्चे और परिवार सहज महसूस करेंगे
  • विवादों का समाधान आसान होगा

यह बदलाव न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बना सकता है।

लोगों की प्रतिक्रिया!

इस बयान के बाद लोगों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि परंपराओं में बदलाव सोच-समझकर करना चाहिए।

हालांकि ज्यादातर विशेषज्ञ इसे एक जरूरी और समय के अनुरूप बदलाव मानते हैं।

CJI सूर्यकांत का यह सुझाव न्याय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

फैमिली कोर्ट में यूनिफॉर्म हटाने का उद्देश्य सिर्फ नियम बदलना नहीं, बल्कि अदालत को एक मानवीय और सहज स्थान बनाना है।

अगर यह बदलाव लागू होता है, तो इससे लाखों परिवारों को फायदा हो सकता है और न्याय प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बन सकती है।

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