भारत में एलएनजी संकट : पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को गहरा झटका दिया है। कतर ने ईरान के ड्रोन हमलों के बाद रास लाफान और अन्य प्रमुख एलएनजी प्लांटों पर उत्पादन रोक दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने से वैश्विक गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक, कतर से अपनी कुल जरूरत का लगभग 40% हिस्सा लेता है। पेट्रोनेट एलएनजी ने फोर्स मेजर घोषित कर दिया, जिससे सालाना 27 मिलियन टन एलएनजी आयात में भारी कटौती हो गई है। इससे औद्योगिक क्षेत्र, शहर गैस वितरण और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
भारत में एलएनजी संकट कतर-ईरान संघर्ष का मुख्य कारण
ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में कतर के ऊर्जा ठिकानों पर ड्रोन अटैक किए। रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी, दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात केंद्र, प्रभावित हुआ। कतरएनर्जी ने उत्पादन ठप कर दिया और फोर्स मेजर घोषित किया। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल का 20% और एलएनजी का बड़ा हिस्सा संभालता है, अब जहाजों के लिए असुरक्षित हो गया है। भारत की 52% कच्चे तेल आयात और बड़ी मात्रा में एलपीजी-एलएनजी इसी रूट से आती है। परिणाम: वैश्विक एलएनजी कीमतें 40% तक बढ़ीं, एशियाई स्पॉट मार्केट में तेज उछाल।

भारत पर 40% सप्लाई हिट का असर
- #भारत FY26 के पहले 10 महीनों में 88.6% ऊर्जा आयात पर निर्भर रहा।
- घरेलू उत्पादन 23.5 मिलियन टन स्थिर है, लेकिन मांग 202.2 मिलियन टन तक पहुंच गई।
- कतर से 40% कटौती से रोजाना 60 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस कम मिल रही है।
- गेल और अन्य कंपनियां औद्योगिक उपभोक्ताओं को सप्लाई घटा रही हैं।
- एलपीजी कीमतें 7% बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये (14.2 किलो सिलेंडर) और कमर्शियल 1,883 रुपये हो गईं।
उद्योगों पर भारी मार
- उर्वरक क्षेत्र: यूरिया उत्पादन में 60% एलएनजी कतर से आती है। हालांकि प्राथमिकता क्षेत्र होने से कटौती कम, लेकिन हल्की कमी संभव। स्टॉक मजबूत – 17.7 मिलियन टन (पिछले साल से 36.5% ज्यादा), DAP-NPK 70-80% अधिक। खरीफ बुवाई के लिए पर्याप्त, लेकिन लंबे संकट में समस्या।
- पावर सेक्टर: बिजली उत्पादन में एलएनजी का उपयोग प्रभावित, लेकिन कोयला विकल्प उपलब्ध।
- अन्य उद्योग: सिरेमिक, कांच, स्पंज आयरन, पेट्रोकेमिकल्स में भारी कटौती।
- कंपनियां कोयला, नेफ्था या फर्नेस ऑयल की ओर मुड़ रही हैं, जिससे लागत बढ़ेगी और उत्पादन धीमा होगा।
- शहर गैस (CNG-PNG): उपलब्धता और कीमतों पर असर, घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
सरकार की तैयारी और ऑप्टिमाइजेशन प्लान
- पेट्रोलियम मंत्रालय ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ पर काम कर रहा है – उपलब्ध गैस को प्राथमिकता आधार पर राशनिंग।
- उर्वरक, बिजली और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता। 60% एलएनजी पहले से पश्चिम एशिया के बाहर से आती है।
- अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत तेज।
- चुनौतियां: क्रायोजेनिक टैंकरों की कमी और नए स्रोतों की लिक्विफिकेशन क्षमता।
महंगाई और अर्थव्यवस्था पर खतरा
- एलएनजी संकट से परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा उत्पादों की लागत बढ़ेगी।
- खुले बाजार में गैस महंगी होने से महंगाई का दबाव। अगर युद्ध लंबा चला तो तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लीन एनर्जी (सौर, पवन) ही लंबे समय में ऐसे संकटों से बचाव है।
ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती
ईरान-अमेरिका युद्ध ने साबित कर दिया कि आयात निर्भरता कितनी खतरनाक है। भारत को सप्लाई विविधीकरण, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस करना होगा। फिलहाल सरकार प्रयासरत है, लेकिन आम आदमी पर महंगाई का बोझ पड़ रहा है। वैश्विक शांति ही असली समाधान है, वरना ऊर्जा संकट अर्थव्यवस्था को हिला सकता है।