ईरान-इजराइल युद्ध : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं (ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार), लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। आमतौर पर भू-राजनीतिक संकट में सोना-चांदी सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में चमकते हैं, लेकिन इस बार उलटा हो रहा है। 9 मार्च 2026 को कॉमेक्स पर सोना 1.3% गिरकर लगभग 5,090 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी में 4% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज हुई। भारत में भी MCX पर कीमतें प्रभावित हुईं, जहां हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव जारी है।
गिरावट के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट कई कारकों का नतीजा है:
- मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले कुछ महीनों में सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी। निवेशक अब मुनाफा बुक कर रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यह कीमती धातुओं में गिरावट का सबसे बड़ा कारण है। युद्ध शुरू होने से पहले की तेजी के बाद अब ‘सेल द न्यूज’ का दौर है।

शेयर बाजार में नुकसान की भरपाई: वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है। निवेशक सोने-चांदी बेचकर नकदी जुटा रहे हैं ताकि स्टॉक मार्केट के नुकसान को कवर कर सकें। यह तरलता (Liquidity) की जरूरत से जुड़ा है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती: युद्ध की अनिश्चितता में निवेशक डॉलर की ओर भाग रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में उछाल आया है, जिससे अन्य मुद्राओं वाले देशों (जैसे भारत) के लिए सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है। मजबूत डॉलर हमेशा सोने पर दबाव डालता है।
- बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीद: ईरान-इजराइल संघर्ष से होर्मुज स्ट्रेट
- में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। इससे कच्चे तेल की कीमतें 17% उछल गईं
- (WTI क्रूड 107 डॉलर के करीब)। महंगाई बढ़ने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में
- कटौती नहीं कर पाएगा। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट को कम आकर्षक बनाती हैं।
- एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसेफ थॉमस का कहना है कि यह गिरावट शॉर्ट-टर्म
- वोलेटिलिटी (अस्थिरता) है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर पारंपरिक फैक्टर जैसे डॉलर
- और ब्याज दरें फिर से कीमतें तय करेंगे। फिलहाल निवेशक सुरक्षित निवेश और नकदी की जरूरत के बीच फंसे हैं।
भारत में क्या स्थिति है?
- भारत में सोना-चांदी की कीमतें वैश्विक ट्रेंड से प्रभावित होती हैं। हाल के दिनों में
- MCX पर सोना 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था
- लेकिन गिरावट के दौर में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। चांदी में भी एक हफ्ते में 14,000 रुपये तक की कटौती देखी गई
- (कुछ रिपोर्ट्स में 2,68,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर)। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं
- कि अगर युद्ध लंबा चला तो सोना फिर से उछाल मार सकता है, लेकिन फिलहाल डॉलर और महंगाई का दबाव ज्यादा है।
भविष्य का क्या परिदृश्य?
- विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है।
- अगर संघर्ष बढ़ा और तेल कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं, तो महंगाई का दबाव बढ़ेगा
- लेकिन लंबे समय में सोना फिर सुरक्षित निवेश के रूप में चमक सकता है।
- हालांकि, मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में कोई कटौती न होने से दबाव बना रहेगा।
- निवेशकों को सलाह है कि वोलेटाइल मार्केट में सतर्क रहें और लॉन्ग-टर्म के लिए सोचना बेहतर है।
यह स्थिति दिखाती है कि बाजार हमेशा अपेक्षित तरीके से रिएक्ट नहीं करते। युद्ध की अनिश्चितता के बीच भी आर्थिक फैक्टर हावी हो सकते हैं। सोना-चांदी में निवेश करने से पहले एक्सपर्ट सलाह लें और बाजार की नब्ज पर नजर रखें।