चंद्र ग्रहण 2026 : 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो होली और होलिका दहन के साथ दुर्लभ संयोग बना रहा है। भारत में यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा, लेकिन भारत में चंद्रोदय शाम करीब 6:26 बजे के आसपास होने से ज्यादातर जगहों पर ग्रहण का अंतिम चरण (करीब 15-25 मिनट) ही दिखाई देगा। झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए यह दिन खास है, जहां ग्रहण के कारण मंदिर के पट बंद रहेंगे, लेकिन सूतक काल का प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट समय-सारणी जारी की है, जिससे लाखों श्रद्धालु प्रभावित होंगे।
चंद्र ग्रहण 2026 का समय और दृश्यता
खगोलीय गणनाओं के अनुसार:

- ग्रहण स्पर्श (शुरुआत): दोपहर 3:20 बजे IST
- पूर्ण ग्रहण (खग्रास): शाम 5:04 बजे से 5:33 बजे तक
- ग्रहण समाप्ति (मोक्ष): शाम 6:48 बजे IST
- कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट भारत में चंद्रमा शाम 6:26-6:32 बजे उदय होगा, इसलिए पूर्वी राज्यों जैसे बिहार-झारखंड में अंतिम चरण ज्यादा स्पष्ट दिखेगा। यह ब्लड मून (लाल चंद्रमा) जैसा नजर आएगा।
देवघर बैद्यनाथ धाम में विशेष नियम – सूतक क्यों नहीं लगता?
अन्य मंदिरों में चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है, जिससे कपाट बंद हो जाते हैं। लेकिन बाबा बैद्यनाथ धाम में सूतक का प्रभाव नहीं पड़ता। कारण पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है – यहां ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा स्वयं विराजमान हैं। जहां चंद्रमा भगवान के सिर पर स्थित है, वहां राहु-केतु का प्रभाव नहीं पहुंचता, इसलिए सूतक नहीं लगता।
इसलिए मंदिर के पट ग्रहण काल प्रारंभ होने पर बंद होते हैं, न कि सूतक से पहले। मंदिर प्रशासन ने नोटिस जारी कर बताया कि ग्रहण के दौरान राहु-केतु के प्रभाव से दिव्य ऊर्जा और भक्तों की सुरक्षा के लिए पूजा-अर्चना स्थगित की जाती है।
मंदिर बंदी की समय-सारणी
- पट बंद: शाम 4:00 बजे IST (ग्रहण शुरू होने से पहले)
- ग्रहण अवधि: शाम 5:47 बजे से 6:48 बजे तक (देवघर समयानुसार थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन मुख्यतः 5:47-6:48)
- शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल अभिषेक, मूर्ति स्नान और विशेष पूजा
- पट खुलना: शाम लगभग 7:30 बजे (श्रृंगार पूजा के बाद दर्शन शुरू) ग्रहण काल में पूजा, भोग, मूर्ति स्पर्श पूरी तरह वर्जित रहेगा। आम श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होगा।
भक्तों के लिए सलाह और उपाय!
मंदिर प्रशासन ने अपील की है कि भक्त समय-सारणी का पालन करें और शांति बनाए रखें। ग्रहण के दौरान:
- घर पर बाबा का नाम जपें, ध्यान करें या स्मरण करें।
- ग्रहण बाद स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें, गंगाजल से हाथ-मुंह धोएं।
- होलिका की राख से तिलक लगाकर नजर दोष दूर करें।
- दान-पुण्य, जप और प्रार्थना करें। अगले दिन धुलेंडी (होली) मनाई जा सकती है।
देवघर में होलिका दहन, ग्रहण और फाल्गुन पूर्णिमा का यह संयोग लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनेगा। बाबा नगरी में उत्साह का माहौल है, लेकिन सुरक्षा और नियमों का पालन जरूरी है। यदि आप देवघर जा रहे हैं, तो मंदिर की आधिकारिक सूचना और समय चेक करें।