झारखंड एयर एम्बुलेंस क्रैश : झारखंड में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस सोमवार (23 फरवरी 2026) की शाम करीब 7:30 बजे चतरा जिले के सिमरिया इलाके (कसारी पंचायत, करमटांड़ जंगल) में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह विमान रेड बर्ड एविएशन का Beechcraft C90 था, जो गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ले जा रहा था।
हादसे की पूरी कहानी
संजय कुमार (41 वर्ष), लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के रखात गांव के निवासी थे। वे बकोरिया में किराए पर ढाबा चलाते थे। 16 फरवरी 2026 को ढाबे में बिजली शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिसमें संजय को 65% तक झुलस गए। उन्हें पहले रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी रही। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर करने की सलाह दी।

परिवार ने संजय की जान बचाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने करीब 8 लाख रुपये का इंतजाम किया – इसमें रिश्तेदारों से उधार, ब्याज पर कर्ज, दोस्तों-परिचितों की मदद शामिल थी। जमीन बेचने का प्लान था, लेकिन समय कम था। आखिरकार परिवार ने एयर एम्बुलेंस बुक की, ताकि संजय जल्द से जल्द दिल्ली पहुंच सकें। विमान में संजय के साथ उनकी पत्नी अर्चना देवी, 17 वर्षीय भतीजा ध्रुव कुमार (या कुछ रिपोर्ट्स में शिवम/शुभम), दो पायलट, एक डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सवार थे।
- विमान रांची एयरपोर्ट से शाम 7:10 बजे उड़ा, लेकिन 7:34 बजे एटीसी से संपर्क टूट गया।
- क्रैश के बाद विमान जंगल में गिरा और आग लग गई। चतरा जिला प्रशासन
- पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे, लेकिन सभी की मौत हो चुकी थी।
- चतरा एसपी सुमित अग्रवाल ने पुष्टि की कि हादसा सिमरिया के जंगल में हुआ।
परिवार की दर्दनाक पृष्ठभूमि
संजय का परिवार पहले से ही मुश्किलों से जूझ रहा था। 2004 में नक्सलियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। भय के माहौल में परिवार 2001 में चंदवा आ बसा। संजय पांच भाइयों में दूसरे थे – बड़े भाई विजय ढाबा चलाते हैं, अजय हरियाणा रोडवेज में जूनियर इंजीनियर हैं। छोटे भाई अरविंद का 2022 में निधन हो गया। मां चिंता देवी अब बेसुध हैं।
- संजय मिलनसार और मेहनती थे। ढाबा चलाकर परिवार का सहारा बने।
- हादसे में उनकी पत्नी और बेटे (13 और 17 वर्षीय) अनाथ हो गए। छह घरों में मातम छा गया।
- परिवार के सदस्य अजय ने बताया, “हमारी उम्मीद दिल्ली के इलाज पर टिकी थी।
- कर्ज लेकर भी हमने कोशिश की, लेकिन किस्मत ने सब छीन लिया।”
अन्य पीड़ितों की कहानी
- हादसे में मारे गए डॉक्टर विकास गुप्ता के पिता ने खेत बेचकर बेटे को डॉक्टर बनाया था।
- पिता शव देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। पायलट और पैरामेडिकल स्टाफ के परिवार भी सदमे में हैं।
जांच और आगे क्या?
- डीजीसीए और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जांच शुरू कर दी है।
- मौसम खराब होने या तकनीकी खराबी का संदेह है, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं।
- यह पिछले महीने हुए बारामती क्रैश के बाद दूसरा बड़ा चार्टर प्लेन हादसा है।
यह घटना न केवल एक परिवार की, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाती है – एयर एम्बुलेंस की सुरक्षा, महंगे इलाज की पहुंच और गरीब परिवारों की मजबूरी। संजय की कहानी दर्दनाक है: एक जान बचाने की कोशिश में सात जिंदगियां चली गईं। परिवार अब कर्ज और दुख के बोझ तले दबा है। क्या सरकार या समाज मदद करेगा?
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