महाकालेश्वर मंदिर : उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालु यहां बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन VIP दर्शन और गर्भगृह में विशेष प्रवेश का मुद्दा लंबे समय से विवादास्पद रहा है। आम श्रद्धालु दूर से दर्शन करते हैं, जबकि VIP, नेता और प्रभावशाली लोग गर्भगृह में जाकर जलाभिषेक कर पाते हैं। इसी को चुनौती देते हुए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह फैसला 27 जनवरी 2026 को आया, जिसने धार्मिक स्थलों पर VIP सुविधा के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।
याचिका का आधार और कोर्ट की सुनवाई
याचिकाकर्ता दर्पन अवस्थी (उज्जैन निवासी) ने दावा किया कि महाकाल मंदिर में VIP दर्शन से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना था कि जब आम श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पाते, तो VIP स्टेटस या सिफारिश के आधार पर कुछ लोग क्यों जल चढ़ा पाते हैं? याचिका में मांग की गई थी कि सभी के लिए समान अवसर हो और VIP दर्शन पर रोक लगाई जाए।

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने तर्क दिया कि यह भेदभाव है। उन्होंने कहा, “अगर कलेक्टर की सिफारिश पर कोई गर्भगृह में जा सकता है, तो महाकाल के अन्य भक्तों को भी देवता को जल चढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए।”
- लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच (CJI डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और अन्य)
- ने याचिका को सुनते ही खारिज कर दिया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
- के 28 अगस्त 2025 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें भी याचिका खारिज हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस और बेंच ने सख्त टिप्पणी की:
- “वे श्रद्धालु नहीं हैं। हम आगे इस पर बोलना नहीं चाहते। इन लोगों का उद्देश्य कुछ और होता है।”
- “क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह फैसला करने का काम कोर्ट का नहीं है। हम न्यायिक प्रक्रिया के लिए हैं।”
- “VIP दर्शन या मंदिर में प्रवेश को विनियमित करना अदालत का क्षेत्राधिकार नहीं है।”
- कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार और प्रशासन से प्रतिनिधित्व (representation) करने की
- अनुमति दी, लेकिन खुद कोई हस्तक्षेप नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे
- प्रशासनिक फैसले नीति-निर्माताओं के हैं, न कि न्यायालय के।
महाकाल मंदिर में VIP दर्शन की वर्तमान व्यवस्था
- महाकालेश्वर मंदिर में VIP दर्शन सुविधा जारी है। श्रद्धालु शीघ्र दर्शन टिकट खरीदकर
- तेजी से दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में विशेष प्रवेश केवल चुनिंदा VIP को मिलता है।
- हाल के वर्षों में मंदिर की आमदनी बढ़ी है और दर्शन घोटाले के मामलों में कार्रवाई भी हुई है।
- नए साल 2025 में मुफ्त VIP सेवा बंद कर दी गई थी, लेकिन नियमित VIP व्यवस्था बनी हुई है।
- यह फैसला अन्य धार्मिक स्थलों जैसे तिरुपति, वैष्णो देवी आदि पर
भी असर डाल सकता है, जहां VIP/शीघ्र दर्शन की व्यवस्था है।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया!
- सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग फैसले का स्वागत कर रहे हैं
- और कह रहे हैं कि “VIP कल्चर बंद होना चाहिए”, जबकि कई का मानना है
- कि कोर्ट ने सही किया क्योंकि मंदिर प्रबंधन प्रशासनिक मामला है।
- उज्जैन के स्थानीय लोग और श्रद्धालु कहते हैं
- कि VIP सुविधा से मंदिर की व्यवस्था सुचारु रहती है, लेकिन समानता जरूरी है।
आस्था और प्रशासन का संतुलन
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में न्यायालय सीमित हस्तक्षेप करेगा। VIP दर्शन का मुद्दा अब सरकार और मंदिर ट्रस्ट के पास है। उम्मीद है कि महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन सभी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था करेगा, ताकि बाबा महाकाल के दर्शन में कोई भेदभाव न महसूस हो।