हिमंत बिस्वा सरमा : ममता बनर्जी बंगाल, असम विधानसभा चुनाव 2026, चार राज्यों के CM ब्रांड, विचारधारा vs चेहरा, BJP हिमंत सरमा, पिनाराई विजयन केरल, एमके स्टालिन तमिलनाडु – ये कीवर्ड्स इन दिनों भारतीय राजनीति की सुर्खियों में छाए हुए हैं। असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों में पार्टी से भी बड़े ब्रांड बन चुके हैं। इस बार वोट विचारधारा के बजाय चेहरों के नाम पर मांगे जा रहे हैं।
2026 के इन चुनावों में असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु की सियासत का केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यहां पार्टी की विचारधारा से ज्यादा व्यक्तिगत लोकप्रियता और ब्रांड वैल्यू काम कर रही है।

हिमंत बिस्वा सरमा चार राज्यों में CM ब्रांड का दबदबा
असम में हिमंत बिस्वा सरमा का जलवा: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का ब्रांड BJP से भी बड़ा माना जा रहा है। ‘मामा’ के नाम से मशहूर हिमंत ने भाजपा की हिंदुत्व और विकास एजेंडे को जमीन पर मजबूती से लागू किया है। राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से 103 हिंदू बहुल सीटों पर BJP ने पूरा फोकस किया है, जबकि करीब 23 मुस्लिम बहुल सीटें कांग्रेस को छोड़ दी गई हैं। हिमंत को केंद्र की तरफ से खास स्वायत्तता मिली हुई है, जो आमतौर पर योगी आदित्यनाथ या देवेंद्र फडणवीस जैसे नेताओं को ही दी जाती है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन हिमंत की पकड़ मजबूत दिख रही है।
बंगाल में ममता बनर्जी की फाइटर इमेज: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को ‘बंगाल की फाइटर’ कहा जा रहा है। यह उनका अब तक का सबसे कठिन चुनाव माना जा रहा है। समर्थक इसे ‘ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग’ बता रहे हैं। विशेष गहन सत्यापन (SIR) के बाद बंगाल की वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम कट गए हैं। अगर ममता फिर BJP की जीत की राह रोकने में सफल रहीं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी INDIA गठबंधन की अगुवाई का दावा她们 कर सकती हैं। ममता महिलाओं और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भरोसा कर रही हैं।
केरल और तमिलनाडु की कहानी
केरल में पिनाराई विजयन: केरल की परंपरा रही है कि हर पांच साल में सरकार बदल जाती है। लेकिन 2021 में कम्युनिस्ट नेता पिनाराई विजयन ने यह परंपरा तोड़ी और दोबारा जीत हासिल की। इस बार वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। कम्युनिस्ट होने के बावजूद विजयन ने बाजार और केंद्र की भाजपा सरकार के साथ व्यावहारिक तालमेल बिठाया है। अगर वे हार गए तो देश में वाम राजनीति और कमजोर हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक गलियारों में BJP अक्सर कांग्रेस से ज्यादा विजयन को प्राथमिकता देती दिखती है।
- तमिलनाडु में एमके स्टालिन: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने खुद को एक शालीन
- और मिलनसार नेता के रूप में स्थापित किया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद उनकी
- व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ी है। अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK इस चुनाव में ‘X-फैक्टर’ साबित हो सकती है।
- अगर विजय युवाओं और बदलाव चाहने वालों में 15% से ज्यादा वोट काटते हैं
- तो DMK के लिए हैंग असेंबली की स्थिति बन सकती है।
विचारधारा से आगे निकला चेहरा
- इन चारों राज्यों में साफ दिख रहा है कि चेहरा विचारधारा से भारी पड़ रहा है।
- मतदाता पार्टी के बजाय मुख्यमंत्री के नाम पर वोट दे रहे हैं। असम में हिमंत सरमा का
- ब्रांड BJP को भी पीछे छोड़ता दिख रहा है। बंगाल में ममता की फाइटर इमेज
- महिलाओं और अल्पसंख्यकों के बीच गहरी पैठ रखती है।
वोटर टर्नआउट भी काफी अच्छा रहा – असम में 85%, केरल में 78% के आसपास। बंगाल में BJP महिलाओं के आरक्षण बिल (नारी आरक्षण संशोधन विधेयक) को 16-18 अप्रैल को विशेष सत्र में लाकर ममता के महिलाओं वाले कार्ड का जवाब देने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक मायने
- ये चुनाव केवल राज्य सरकार बनाने तक सीमित नहीं हैं। अगर ममता बंगाल में फिर काबिज होती हैं
- तो विपक्षी एकता को मजबूती मिल सकती है। वहीं हिमंत सरमा की जीत BJP को पूर्वोत्तर में और मजबूत करेगी।
- केरल में वामपंथ की किस्मत और तमिलनाडु में डीएमके बनाम
- एआईएडीएमके व AIADMK के अलावा विजय की पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करेगा।
- विश्लेषकों का कहना है कि आज के समय में क्षेत्रीय नेता अपनी पार्टी से बड़े ब्रांड बन चुके हैं।
- हिमंत सरमा का ब्रांड BJP से आगे निकलता दिख रहा है, तो ममता बनर्जी
- बंगाल की फाइटर इमेज के साथ अपनी लड़ाई लड़ रही हैं।
2026 के इन चार राज्यों के चुनाव साबित कर रहे हैं कि भारतीय राजनीति अब व्यक्तिगत ब्रांड और चेहरों पर ज्यादा निर्भर हो गई है। विचारधारा अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन मुख्यमंत्री की लोकप्रियता और ग्राउंड पर उनके काम उसे पीछे छोड़ रहे हैं। हिमंत बिस्वा सरमा का उदय BJP के लिए एक नया मॉडल साबित हो रहा है, जबकि ममता बनर्जी की जिद और फाइटर स्पिरिट बंगाल की राजनीति को अलग रंग दे रही है।