सर्जियो गोर कौन हैं : अमेरिका-भारत संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच बड़ा व्यापार समझौता हुआ है, जिसमें टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया। इस डील के पीछे अमेरिका के भारत में नए राजदूत सर्जियो गोर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ट्रंप प्रशासन के सबसे करीबी सहयोगियों में शुमार गोर को ‘मार-ए-लागो का मेयर’ भी कहा जाता है। आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी, पृष्ठभूमि और भारत-अमेरिका संबंधों में उनके योगदान के बारे में।
सर्जियो गोर की पृष्ठभूमि और शुरुआती जीवन
#सर्जियो गोर का जन्म 1986 में उज्बेकिस्तान (तत्कालीन सोवियत संघ) में हुआ था। उनका असली नाम सर्गेई गोरोखोव्स्की था, जो बाद में सर्जियो गोर हो गया। उनके माता-पिता रूसी मूल के हैं और परिवार माल्टा में रहा। 1990 के दशक के अंत में वे अमेरिका चले गए, जहां उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिली। गोर ने जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया।

राजनीति में उनकी शुरुआत रिपब्लिकन पार्टी से हुई। उन्होंने सीनेटर रैंड पॉल के कार्यालय में काम किया और धीरे-धीरे डोनाल्ड ट्रंप के आंतरिक सर्कल में शामिल हो गए। ट्रंप के लिए वे ‘संकटमोचक’ (troubleshooter) के रूप में मशहूर हैं। 2020 में उन्होंने ट्रंप विक्ट्री फाइनेंस कमेटी के चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर चुनावी फंड जुटाने में अहम भूमिका निभाई। ट्रंप की हार के बाद भी उनकी वफादारी बनी रही। उन्होंने ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ एक पब्लिशिंग हाउस शुरू किया, जिसने कई बेस्टसेलर किताबें प्रकाशित कीं।
- ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में गोर व्हाइट हाउस के कार्मिक कार्यालय के निदेशक बने
- जहां उन्होंने हजारों नियुक्तियों में ‘लॉयल्टी टेस्ट’ सुनिश्चित किया। ट्रंप परिवार से उनकी इतनी
- निकटता है कि मार-ए-लागो गोल्फ रिसॉर्ट में वे कार्यक्रमों में डीजे भी बनते हैं।
भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में नियुक्ति
- अगस्त 2025 में ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण-मध्य एशिया के विशेष
- दूत के रूप में नामित किया। जनवरी 2026 में उन्होंने नई दिल्ली में पदभार संभाला।
- मात्र 39 साल की उम्र में वे भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत बने। पद संभालते ही गोर
- ने ट्रंप-मोदी दोस्ती पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ट्रंप और मोदी की दोस्ती असली है।
- असली दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन मतभेद सुलझा लेते हैं।”
गोर ने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में असीमित संभावनाएं हैं। उन्होंने ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को साइन की तस्वीर भेजी, जिसमें लिखा था – “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, आप महान हैं।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में गोर की भूमिका
- फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका के बीच बड़ा व्यापार डील फाइनल हुआ। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर घोषणा
- की कि भारत 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदेगा और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ जीरो होगा।
- बदले में अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया।
- इस डील को सुलझाने में गोर ‘मास्टरमाइंड’ कहे जा रहे हैं।
समझौते से पहले गोर ने X पर पोस्ट किया – “राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। बने रहें।” ट्रंप-मोदी फोन कॉल के बाद डील हुई। गोर ने कहा कि यह ट्रंप और मोदी की व्यक्तिगत दोस्ती का नतीजा है। उन्होंने भारत को ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया, जो सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन पर फोकस्ड है। ट्रंप के अगले 1-2 साल में भारत दौरे की संभावना भी जताई।
गोर ने इंटरव्यू में कहा, “यह दोनों देशों के लिए शानदार खबर है। अमेरिका व्यापार के लिए खुला है। अभी बहुत कुछ अच्छा होना बाकी है।”
ट्रंप-मोदी दोस्ती और भविष्य की संभावनाएं!
- ट्रंप ने कई बार भारत पर रूस से तेल खरीदने का आरोप लगाया और टैरिफ धमकियां दीं
- लेकिन गोर ने हमेशा सकारात्मक रुख अपनाया। उनकी वजह से संबंध मजबूत हुए।
- विशेषज्ञों का मानना है कि गोर ट्रंप की ‘ट्रस्टेड’ आवाज हैं,
- जो भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे।
सर्जियो गोर सिर्फ एक राजदूत नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन के भारत नीति के प्रमुख आर्किटेक्ट हैं। उनकी नियुक्ति और व्यापार डील से साफ है कि भारत-अमेरिका संबंध अब नई गति पकड़ रहे हैं। टैरिफ कम होना, तकनीकी सहयोग और व्यक्तिगत दोस्ती – ये सब मिलकर दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ साबित हो रहे हैं।
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