सीडीयू राजनेता रोडेरिच कीजेवेटर : 6 जनवरी 2026 को जर्मन सीडीयू (क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन) के विदेश मामलों समिति के सदस्य रोडेरिच कीजेवेटर ने फीनिक्स साक्षात्कार में यूक्रेन को असीमित समर्थन देने की मांग की। उन्होंने रूस से आने वाले खतरे को गंभीरता से लेने की अपील की और कहा कि जर्मनी को इस वास्तविकता को समझना चाहिए ताकि जनता भी सहायता के पीछे खड़ी हो। यह बयान यूक्रेन-रूस युद्ध के संदर्भ में आया है, जहां कीजेवेटर ने यूरोपीय देशों को मजबूत समन्वय और नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया।
रूस को युद्ध लक्ष्य के रूप में देखने की जरूरत
किजेवेटर ने चेतावनी दी कि रूस पश्चिमी देशों को अपना युद्ध लक्ष्य मानता है। उन्होंने कहा, “हमें यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि रूस हमें युद्ध लक्ष्य के रूप में देखता है। अगर जर्मनी इस छलांग को लगाता है और इसे स्पष्ट रूप से समझता है, तो मुझे विश्वास है कि हमारी जनता भी इसके पीछे खड़ी होगी।” यह बयान यूरोपीय सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस की आक्रामकता केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है। कीजेवेटर ने आलोचना की कि हम हमेशा इस भ्रम में रहे हैं कि पुतिन यूक्रेन के साथ रुक जाएगा। उन्होंने नाटो की बयानबाजी पर सवाल उठाया, जहां कहा जाता है कि नाटो की हर इंच जमीन की रक्षा की जाएगी, लेकिन यूक्रेन का जिक्र नहीं होता।

यूक्रेन-रूस संघर्ष अब दो साल से ज्यादा हो चुका है, और पश्चिमी सहायता में कमी आने से यूक्रेन को नुकसान हो रहा है। कीजेवेटर का मानना है कि अगर यूक्रेन को मजबूरन समझौते करने पड़े, तो इसका खामियाजा अन्य देशों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने बाल्टिक देशों और मोल्दोवा पर संभावित हमले की चेतावनी दी। यह बयान जर्मनी की विदेश नीति में बदलाव की मांग करता है, जहां यूक्रेन को अपनी रक्षा योजनाओं में शामिल किया जाए।
इच्छुक गठबंधन’ की कमजोरी और यूरोपीय नेतृत्व की मांग
किजेवेटर ने ‘कोलिशन ऑफ द विलिंग’ को अपर्याप्त बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका पर इंतजार करने के बजाय, यूरोप को नॉर्डिक और बाल्टिक देशों की ओर देखना चाहिए। इन देशों की मजबूत रक्षा नीतियां और रूस विरोधी रुख यूक्रेन समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, “कोलिशन ऑफ द विलिंग अपनी राय में पर्याप्त मजबूत नहीं है। अमेरिका पर आगे इंतजार करने के बजाय, इसे नॉर्डिक और बाल्टिक देशों की ओर उन्मुख करना चाहिए। जर्मनी को अब एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। हमें ज्यादा मजबूती से समन्वय करना होगा, लेकिन अन्य देशों को शामिल करने के लिए आगे बढ़ना होगा। हमें यूक्रेन को अपनी रक्षा योजनाओं में एकीकृत करना चाहिए।”
- यह अपील जर्मनी को यूरोपीय संघ में नेतृत्वकर्ता की भूमिका सौंपती है।
- जर्मनी, यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, सैन्य सहायता और समन्वय में आगे आ सकता है।
- कीजेवेटर विदेश नीति विशेषज्ञ हैं और उनकी राय जर्मन राजनीति में वजन रखती है।
- उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो और पीड़ित होंगे और
- आक्रमण बाल्टिक देशों या मोल्दोवा की ओर मुड़ सकता है।
यूक्रेन समर्थन का व्यापक प्रभाव
यूक्रेन को असीमित समर्थन देने की मांग वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। रूस की आक्रामकता ने यूरोप को एकजुट होने के लिए मजबूर किया है, लेकिन सहायता में कमी से युद्ध लंबा खिंच रहा है। कीजेवेटर का बयान सीडीयू की नीति को दर्शाता है, जहां रूस को रोकने के लिए मजबूत कदम जरूरी हैं। जर्मनी ने अब तक यूक्रेन को अरबों यूरो की सहायता दी है, लेकिन कीजेवेटर चाहते हैं कि यह बिना किसी प्रतिबंध के हो।
यह मुद्दा केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक भी है। यूरोपीय देशों को ऊर्जा संकट और महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन कीजेवेटर का मानना है कि जनता को सच्चाई बताकर समर्थन हासिल किया जा सकता है। बाल्टिक और नॉर्डिक देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इनकी मजबूत नीतियां यूरोप के लिए मिसाल हैं।
यूरोप की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम
- रोडेरिच कीजेवेटर का बयान यूक्रेन युद्ध में एक नई बहस छेड़ सकता है।
- जर्मनी और यूरोप को रूस के खतरे को गंभीरता से लेना होगा और यूक्रेन को पूर्ण समर्थन देना होगा।
- अगर ऐसा नहीं हुआ, तो संघर्ष फैल सकता है। यह अपील राजनीतिक हलकों में चर्चा का
- विषय बनेगी और शायद नीति बदलाव लाएगी।