साइना नेहवाल : भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास की आधिकारिक घोषणा कर दी है। 20 जनवरी 2026 को एक पॉडकास्ट में साइना ने खुलासा किया कि घुटने की गंभीर पुरानी चोट और आर्थराइटिस के कारण उनका शरीर अब एलीट स्तर के खेल की मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने दो साल पहले ही खेलना बंद कर दिया था। मैंने अपनी शर्तों पर खेल शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही छोड़ा, इसलिए अलग से घोषणा की जरूरत नहीं समझी।” साइना ने आगे बताया, “कार्टिलेज पूरी तरह खराब हो गया है, आर्थराइटिस हो गया है। अब ट्रेनिंग सिर्फ 1-2 घंटे में घुटना जवाब दे देता है। मैंने सोचा, ‘बस काफी है, अब और नहीं धकेल सकती।'”
35 वर्षीय साइना ने आखिरी बार 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मैच खेला था। उसके बाद से वे कोर्ट से दूर थीं और चोट के कारण हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग असंभव हो गई थी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने साफ कर दिया था कि आगे खेलना मुश्किल है। साइना ने अपने माता-पिता और कोच को पहले ही बता दिया था, “अब शायद मैं यह नहीं कर पाऊंगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी अनुपस्थिति से ही लोग समझ जाएंगे कि वे अब खेल नहीं रही हैं।

साइना नेहवाल का शानदार करियर
#साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वे भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता। 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक उनके सबसे बड़े उपलब्धियों में से एक है। इसके अलावा:
- 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 बनीं (भारतीय महिला खिलाड़ी के लिए पहली बार)।
- 2008 में BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड।
- 2009 इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज खिताब।
- 2010 और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल (दो सिंगल्स गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय)।
- 2015 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर, 2017 में ब्रॉन्ज।
- एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज पदक।
#साइना ने कुल मिलाकर कई सुपर सीरीज और ग्रैंड प्रिक्स टाइटल जीते। वे भारतीय बैडमिंटन की ट्रेलब्लेजर रहीं, जिन्होंने पी. वी. सिंधु, लक्ष्य सेन जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए रास्ता तैयार किया। भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड (2009), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2010), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) से सम्मानित किया।
चोटों का लंबा संघर्ष
- साइना का करियर चोटों से प्रभावित रहा। 2016 रियो ओलंपिक के दौरान घुटने की गंभीर चोट
- ने उन्हें लंबे समय तक परेशान किया। उसके बाद कई बार सर्जरी और रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा।
- 2024 में भी उन्होंने गठिया (आर्थराइटिस) का खुलासा किया था, जिसके कारण ट्रेनिंग मुश्किल हो गई थी।
- साइना ने कहा, “दुनिया में बेस्ट बनने के लिए 8-9 घंटे ट्रेनिंग करनी पड़ती है
- लेकिन अब मेरा घुटना 1-2 घंटे में ही सूज जाता था।”
संन्यास के बाद क्या?
- साइना ने संन्यास को अपनी शर्तों पर लिया है। वे कोचिंग में आने की बात फिलहाल नहीं कर रही हैं।
- उनका पति पारुपल्ली कश्यप (जिनसे 2025 में अलगाव की खबर आई थी)
- भी बैडमिंटन से जुड़े हैं। साइना ने युवा खिलाड़ियों की तारीफ की और कहा कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य उज्ज्वल है।
साइना नेहवाल का संन्यास भारतीय खेल जगत के लिए एक युग का अंत है। वे न सिर्फ मेडल जीतने वाली खिलाड़ी थीं, बल्कि लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहीं। उनकी मेहनत, जज्बा और संघर्ष हमेशा याद रखे जाएंगे।