शीहबाज शरीफ : मध्य पूर्व में तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बड़ी कूटनीतिक कोशिश की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर को लेबनान तक बढ़ाने की अपील की, लेकिन उनकी एक भी गुहार नहीं सुनी गई। अमेरिका और इजराइल ने लेबनान पर हमलों को रोकने से साफ मना कर दिया। इस घटना ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की साख पर सवाल उठा दिए हैं।
शीहबाज शरीफ ने क्या दावा किया था?
8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि ईरान और अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ, लेबनान और अन्य सभी जगहों पर तुरंत युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं। यह फैसला अभी इसी वक्त से प्रभावी है।”

शरीफ ने आगे लिखा कि वे दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद आमंत्रित कर रहे हैं, ताकि सभी विवादों को सुलझाने के लिए निर्णायक बातचीत हो सके। उन्होंने इस सीजफायर को “समझदारी भरा फैसला” बताया और दोनों पक्षों का आभार जताया।
- पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश किया।
- शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड
- ट्रंप से बातचीत की थी, जिसके बाद ट्रंप ने दो हफ्ते का सीजफायर घोषित किया।
इजराइल का साफ इनकार
लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शरीफ के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। इजराइल हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा।
- इजराइल का तर्क है कि उसका लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष अलग मुद्दा है।
- यह ईरान-अमेरिका तनाव से जुड़ा नहीं है। इजराइली हमलों के बाद
- लेबनान में स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है।
- अमेरिका की तरफ से भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई कि सीजफायर लेबनान को कवर करता है।
- इस वजह से शहबाज शरीफ की कोशिश बेनतीजा रही। उनकी एक भी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया।
पाकिस्तान की किरकिरी क्यों?
यह घटना पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका मानी जा रही है। शरीफ ने सीजफायर को “हर जगह” लागू बताया था, जिसमें लेबनान भी शामिल था। लेकिन इजराइल और अमेरिका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
- पाकिस्तानी मीडिया और विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं।
- कई लोग पूछ रहे हैं कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कितनी अहमियत है
- जब उसकी एक भी गुहार नहीं सुनी गई।
- मध्य पूर्व में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है।
- हाल के हफ्तों में इजराइल ने लेबनान पर कई हमले किए हैं।
- ईरान ने भी सीजफायर तोड़ने की धमकी दी है अगर लेबनान पर हमले जारी रहे।
मध्य पूर्व की जटिल स्थिति
वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर चल रहा है। पाकिस्तान ने इसमें अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने खुद शरीफ और मुनीर का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई रोक दी, लेकिन इसके बदले ईरान को हORMुज जलडमरूमध्य खोलना होगा।
- फिर भी, लेबनान मुद्दा अलग खड़ा है। इजराइल इसे अपना सुरक्षा मुद्दा मानता है
- और किसी भी सीजफायर में शामिल होने को तैयार नहीं है।
- विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व शांति के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।
- सीजफायर कितना टिकाऊ होगा, यह देखना बाकी है। ईरान ने चेतावनी दी है
- कि अगर इजराइल लेबनान पर हमले नहीं रोकेगा तो वह सीजफायर तोड़ सकता है।
कूटनीति की सीमाएं!
शहबाज शरीफ की कोशिश सराहनीय थी, लेकिन वास्तविकता अलग निकली। अमेरिका और इजराइल ने लेबनान हमले पर साफ मना कर दिया। इससे साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़े खिलाड़ी अक्सर अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं।
पाकिस्तान अब इस्लामाबाद टॉक्स की तैयारी कर रहा है, लेकिन लेबनान मुद्दे पर सफलता मिलना मुश्किल दिख रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति कैसे बदलती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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