विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत : हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके स्मरण के बिना अधूरी मानी जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला देवता कहा जाता है। इसी कारण संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष महत्व रखता है। अधिक मास में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जाती है। यह व्रत लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और श्रद्धालु भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
#विभुवन संकष्टी चतुर्थी अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अधिक मास में पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में जब पांडव अपना पूरा राज्य जुए में हार गए थे
- तब उन्हें वनवास का जीवन बिताना पड़ा। जंगलों में भटकते हुए वे अनेक कठिनाइयों और
- दुखों का सामना कर रहे थे। एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ऐसा कौन-सा व्रत है
- जिसे करने से उनके कष्ट दूर हो जाएं और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल सके।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत के बारे में बताया। श्रीकृष्ण ने कहा कि अधिक मास में आने वाली यह चतुर्थी अत्यंत फलदायी है। जो भी व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इस व्रत को करता है, उसके जीवन के सभी संकट समाप्त हो जाते हैं और उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है।
भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने द्रौपदी सहित विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा और भगवान गणेश की आराधना की। गणपति बप्पा की कृपा से उनके जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे समाप्त होने लगीं। अंततः उन्हें अपना राज्य वापस प्राप्त हुआ और सभी दुखों से मुक्ति मिली। इसी कारण इस व्रत को संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
दूसरी प्रचलित कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार देवी-देवताओं पर भयंकर संकट आ गया। उन्होंने उस संकट से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव की शरण ली। भगवान शिव ने अपने पुत्रों भगवान गणेश और कार्तिकेय को समस्या का समाधान खोजने के लिए कहा।
- शिवजी ने दोनों पुत्रों की परीक्षा लेने के लिए कहा कि जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौट आएगा
- वही इस कार्य का अधिकारी होगा। कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा
- के लिए निकल पड़े, जबकि भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा कर ली।
- उन्होंने कहा कि माता-पिता ही समस्त संसार के समान हैं।
भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें विजेता घोषित किया और सभी संकटों का समाधान करने का अधिकार प्रदान किया। तभी से भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और संकटों का नाश करने वाला देवता माना जाने लगा।
व्रत करने की विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें।
- गणेश मंत्रों का जाप करें।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।
- जरूरतमंद लोगों को दान दें।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि आप भी अपने जीवन के संकटों से मुक्ति चाहते हैं तो इस पावन दिन भगवान गणेश की पूजा करें और व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।