बांकीपुर उपचुनाव : जन सुराज पार्टी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर लड़कर सभी सीटों पर हार झेलने के बाद भी पार्टी ने हार नहीं मानी है। अब प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी पटना की बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में ताल ठोक रही है और भाजपा को उसके मजबूत गढ़ में हराने का दावा कर रही है।
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई है। नितिन नवीन इस सीट से लगातार 5 बार विधायक रह चुके हैं। इससे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी 4 बार यहां से विधायक रहे। ऐसे में इस सीट को भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है।

बांकीपुर उपचुनाव: जन सुराज की नई चुनौती
प्रशांत किशोर ने शिवहर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जन सुराज इस उपचुनाव में भाजपा को सीधी चुनौती देगी। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर में पिछले 40-45 सालों से एक ही परिवार का कब्जा रहा है। आरजेडी और कांग्रेस यहां कई बार हार चुकी हैं, लेकिन जन सुराज भाजपा को उसके घर में घुसकर हराएगी।
2025 चुनाव में जन सुराज की करारी हार
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई सीट नहीं जीत सकी। बांकीपुर सीट पर पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को महज 7717 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। वहीं, नितिन नवीन ने आरजेडी की रेखा कुमारी को 51 हजार वोटों के अंतर से हराया था।
- फिर भी प्रशांत किशोर हार नहीं मान रहे। उन्होंने कहा कि जन सुराज बांकीपुर
- उपचुनाव में मजबूती से लड़ेगी और भाजपा को चुनौती देगी।
बांकीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास
- नितिन नवीन: 5 बार के विधायक (2008 परिसीमन के बाद पटना पश्चिम से भी लड़े)
- नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा: 4 बार के विधायक (नितिन के पिता)
- पिछले चुनाव में भाजपा का भारी बहुमत
- यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गई है। अटकलें हैं
- कि भाजपा संजय मयूख (एमएलसी) को यहां से टिकट दे सकती है।
प्रशांत किशोर की रणनीति क्या है?
- प्रशांत किशोर पिछले कई सालों से बिहार में बदलाव की बात कर रहे हैं। जन सुराज अभियान
- के तहत उन्होंने पूरे बिहार में पदयात्रा की और जनता से सीधा संवाद किया।
- उनका मुख्य फोकस बिहार के युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर है।
- हालांकि 2025 के चुनाव में मिली हार के बाद कई लोग उनकी पार्टी को कमजोर मान रहे थे
- लेकिन पीके उपचुनाव को अपनी पार्टी को फिर से स्थापित करने का मौका बता रहे हैं।
जन सुराज का दावा है कि वे बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। NDA और INDIA गठबंधन के अलावा जन सुराज को नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
उपचुनाव का महत्व
बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम है।
- भाजपा के लिए अपनी गढ़ की रक्षा करना जरूरी
- जन सुराज के लिए अस्तित्व की लड़ाई
- आरजेडी-कांग्रेस के लिए भी चुनौती
चुनाव आयोग जल्द ही उपचुनाव की तारीख घोषित करेगा। नियम के मुताबिक 6 महीने के अंदर चुनाव कराना अनिवार्य है।
क्या जन सुराज कर पाएगी कमबैक?
- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि एक सीट पर फोकस करने से जन सुराज को फायदा हो सकता है।
- पूरे बिहार में 238 सीटों पर लड़ना पार्टी की क्षमता से बाहर था, लेकिन एक मजबूत सीट पर लड़ाई आसान हो सकती है।
- प्रशांत किशोर का अनुभव (राष्ट्रीय स्तर के स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में) उन्हें फायदा दे सकता है।
- अगर वे बांकीपुर में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो 2025 की हार को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बन सकता है।
जन सुराज पार्टी की बांकीपुर उपचुनाव में एंट्री बिहार की राजनीति को रोचक बना रही है। प्रशांत किशोर का “भाजपा को गढ़ में हराने” वाला बयान सुर्खियां बटोर रहा है। अब देखना होगा कि उपचुनाव में पीके की पार्टी कितना वोट शेयर हासिल करती है और क्या वह भाजपा के मजबूत किले को तोड़ पाती है।
Read More : Oppo Find X10 Leak: 8000mAh बैटरी और 165Hz डिस्प्ले के साथ मचाएगा तहलका!