फिर टूटेगी कांग्रेस मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी के कई नेताओं और विधायकों ने खुलकर नाराजगी जताई है। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है, जबकि बीजेपी तीसरे उम्मीदवार उतारकर फायदा उठाने की तैयारी में है।

राज्यसभा चुनाव का पूरा मामला
मध्य प्रदेश से तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन, बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह शामिल हैं। दिग्विजय सिंह ने एक और कार्यकाल के लिए इच्छा नहीं जताई है। मतदान 18 जून 2026 को होगा।
बीजेपी के उम्मीदवार: राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल। कांग्रेस की उम्मीदवार: मीनाक्षी नटराजन।
नंबर गेम और स्थिति
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता वाले वोट चाहिए।
- बीजेपी: 164 विधायक। दो सीटों के लिए 116 वोट काफी हैं। बचे 48 वोटों से
- तीसरे उम्मीदवार को आसानी से जिताया जा सकता है (केवल 10 अतिरिक्त वोट चाहिए)।
- कांग्रेस: कुल 64 विधायक थे, लेकिन कुछ विधायकों की अयोग्यता और सुप्रीम कोर्ट
- के आदेश के कारण अब 62 वैध वोट बचे हैं। एक सीट तो पार्टी जीत सकती है, लेकिन बगावत का खतरा मंडरा रहा है।
मीनाक्षी नटराजन पर क्यों विवाद?
- कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को टिकट दिया है
- जो राहुल गांधी की करीबी मानी जाती हैं। लेकिन पार्टी के अंदर इस फैसले का विरोध हो रहा है।
- भोपाल के कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर कहा कि यह “बड़ी गलती” है।
- उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा कि अगर दिग्विजय सिंह को टिकट दिया
- जाता तो सीट सुरक्षित रहती। 2014 में मंदसौर सीट हारने के बाद
- नटराजन का स्थानीय नेताओं और विधायकों से संपर्क कम हो गया है।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के एक विधायक (नाम न छापने की शर्त पर) ने कहा कि नटराजन वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन राज्य स्तर पर उनका संपर्क टूट गया है। इससे विधायकों में बेचैनी है और क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है।
फिर टूटेगी कांग्रेस बीजेपी का प्लान
बीजेपी इस अंदरूनी कलह का पूरा फायदा उठा रही है। वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अगर पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसकी जीत सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने ज्ञानचंदानी के पोस्ट को शेयर कर तंज कसा कि कांग्रेस में अब अपने ही लोग विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस ने बुलाई विधायकों की बैठक
क्रॉस वोटिंग के डर को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों की अहम बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है।
इतिहास गवाह है – पहले भी हुई बगावत
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए राज्यसभा चुनाव हमेशा से चुनौती रहे हैं।
- 2020: ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में 22 विधायकों ने बगावत की, कमलनाथ सरकार गिरी और सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए।
- 2022 राष्ट्रपति चुनाव: कई कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।
ऐसे में 2026 का यह चुनाव कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी है।
आगे क्या हो सकता है?
- अगर कांग्रेस क्रॉस वोटिंग रोकने में नाकाम रही तो बीजेपी तीनों सीटें जीत सकती है।
- वहीं, अगर कांग्रेस अपनी एक सीट बचा लेती है तो भी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचेगा।
- 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए सबक बन सकता है।
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव कांग्रेस की एकजुटता की परीक्षा है। मीनाक्षी नटराजन को लेकर उठा विवाद और बीजेपी का तीसरा उम्मीदवार उतारने का इशारा स्थिति को रोचक बना रहा है। पार्टी नेतृत्व को जल्दी से जल्दी विधायकों को संभालना होगा, वरना 2020 जैसी स्थिति दोहराई जा सकती है।