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अदीना मस्जिद विवाद क्या सच में मंदिर तोड़कर बनाई गई थी मस्जिद? जानिए पूरा मामला!

On: July 25, 2026 3:49 AM
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अदीना मस्जिद विवाद पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में कुछ हिंदू संगठनों ने मस्जिद परिसर के बाहर पूजा-अर्चना की और दावा किया कि यह स्थल पहले आदिनाथ शिव मंदिर था, जिसे ध्वस्त करके 14वीं शताब्दी में मस्जिद का निर्माण कराया गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

अदीना मस्जिद विवाद: पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद की तस्वीर
अदीना मस्जिद विवाद पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद, जो हाल के दिनों में मंदिर होने के दावों और पूजा-अर्चना को लेकर चर्चा में है।

#अदीना मस्जिद का इतिहास

#अदीना मस्जिद पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पांडुआ क्षेत्र में स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1373 ईस्वी में बंगाल सल्तनत के शासक सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, यह मध्यकालीन भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक मानी जाती है और यह एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है।

  • इतिहासकारों के अनुसार यह मस्जिद अपनी विशाल वास्तुकला और इस्लामी स्थापत्य कला
  • के लिए प्रसिद्ध है। इसके निर्माण में विभिन्न प्रकार के पत्थरों और पुरानी
  • इमारतों के अवशेषों का उपयोग किए जाने की चर्चा भी लंबे समय से होती रही है।

हिंदू संगठनों का दावा क्या है?

विवाद तब बढ़ा जब कुछ हिंदू संगठनों ने दावा किया कि अदीना मस्जिद वास्तव में आदिनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। उनका कहना है कि मस्जिद की दीवारों, खंभों और पत्थरों पर आज भी हिंदू एवं बौद्ध प्रतीक दिखाई देते हैं।

  • संगठन का यह भी कहना है कि उनका उद्देश्य मस्जिद परिसर के बाहर शिवलिंग स्थापित करना
  • और आदिनाथ मंदिर के इतिहास को सामने लाना है। उन्होंने स्पष्ट किया
  • कि वे कानून के दायरे में रहकर ही धार्मिक गतिविधियां कर रहे हैं।

पहली बार हुई पूजा-अर्चना

  • रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हिंदू श्रद्धालुओं ने पहली बार मस्जिद परिसर के
  • बाहरी हिस्से में पूजा-अर्चना की। इसके बाद संगठन ने लगभग 1.5 टन वजनी शिवलिंग
  • स्थापित करने की घोषणा भी की है। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए
  • स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

अदीना मस्जिद विवाद राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इस स्थल के ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि मंदिर के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

वहीं, वामपंथी नेताओं ने इस विवाद को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि धार्मिक विवादों के माध्यम से समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

एएसआई का क्या कहना है?

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अदीना मस्जिद को एक संरक्षित स्मारक मानता है।
  • सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह 14वीं शताब्दी की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मस्जिद है।
  • फिलहाल एएसआई की ओर से इस नए दावे पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है।
  • इसलिए मंदिर होने के दावों पर अंतिम निर्णय किसी आधिकारिक जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।

इतिहास और दावों में अंतर समझना जरूरी

  • भारत में कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को लेकर समय-समय पर दावे और विवाद सामने आते रहे हैं।
  • ऐसे मामलों में इतिहास, पुरातत्व, अभिलेखीय साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इसलिए किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जांच
  • न्यायालय के निर्णय और विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक है।

अदीना मस्जिद विवाद केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि इतिहास, पुरातत्व और कानून से जुड़ा विषय भी है। एक ओर हिंदू संगठन इसे प्राचीन आदिनाथ मंदिर बताते हैं, जबकि दूसरी ओर एएसआई के रिकॉर्ड इसे 14वीं शताब्दी की ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में दर्ज करते हैं। फिलहाल इस मामले में विभिन्न पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भविष्य में यदि इस विषय पर कोई आधिकारिक जांच या न्यायिक निर्णय आता है, तो उसी के आधार पर स्थिति और अधिक स्पष्ट होगी।

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