दहेज हत्या : आज के भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार चर्चा में रहते हैं। इनमें से एक सबसे क्रूर और जघन्य अपराध है एसिड अटैक। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में स्पष्ट कहा कि तेजाब हमला दहेज हत्या से किसी भी तरह कम गंभीर नहीं है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र सरकार से कानून में संशोधन पर विचार करने को कहा है ताकि एसिड अटैक के दोषियों को दहेज हत्या जैसे मामलों की तरह सख्त सजा मिल सके।
यह सुनवाई हरियाणा की शाहीन मलिक की जनहित याचिका (PIL) पर हो रही थी। शाहीन खुद एक तेजाब हमले की पीड़िता हैं। साल 2008 में जब उनकी उम्र मात्र 26 साल थी, तब उन पर एसिड अटैक हुआ था। आज 42 साल की उम्र में भी वे न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं। उनके मामले में निचली अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है। शाहीन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि उनकी अपील पर जल्द सुनवाई हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के 16 कीमती साल सिर्फ कानूनी लड़ाई में गंवा दिए।

एसिड अटैक को दहेज हत्या के बराबर गंभीर क्यों माना जाए?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन शामिल थे। पीठ ने साफ कहा –
“तेजाब हमले के मामलों में असाधारण दंडात्मक कदम उठाने होंगे। जब तक सजा आरोपी के लिए पीड़ादायक नहीं होगी, ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे। यहां सुधारात्मक न्याय की कोई गुंजाइश नहीं है।”
- CJI ने पूछा, “आरोपी की संपत्ति क्यों नहीं जब्त की जा सकती?
- उन्होंने सुझाव दिया कि पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए आरोपी की संपत्ति
- जब्त करने जैसे कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने केंद्र सरकार की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल
- से कहा कि दहेज हत्या के केस में जिस तरह दोष साबित करने का बोझ आरोपी पर डाला जाता है
- उसी तरह एसिड अटैक केस में भी कानूनी प्रावधान किए जाएं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ सजा ही काफी नहीं, अपराध को रोकने के लिए निवारक उपाय जरूरी हैं। तेजाब की आसानी से उपलब्धता पर भी सख्ती बरतने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से क्या जानकारी मांगी?
पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इसमें शामिल है –
- पिछले कुछ वर्षों में दर्ज हुए एसिड अटैक केसों का सालवार ब्यौरा
- अदालतों में लंबित मामले और उनकी स्थिति
- पीड़ितों के पुनर्वास के लिए किए गए उपाय
- जिन मामलों में पीड़ितों को तेजाब पिलाने के लिए मजबूर किया गया, उनका विवरण
- हर पीड़िता की शिक्षा, नौकरी, वैवाहिक स्थिति, चिकित्सा खर्च और पुनर्वास योजना की जानकारी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से भी एसिड अटैक के लंबित मामलों की रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की पेशकश भी की और कहा कि उनकी पसंद के सबसे अच्छे वकील मुहैया कराए जा सकते हैं।
एसिड अटैक सर्वाइवर के लिए दिव्यांगता का दायरा बढ़ाने की मांग
- शाहीन मलिक ने याचिका में मांग की है कि दिव्यांगजन अधिकार कानून में संशोधन हो
- ताकि जिन पीड़ितों को तेजाब पिलाया गया और जिनके आंतरिक अंग बुरी तरह
- क्षतिग्रस्त हो गए, उन्हें भी दिव्यांग की श्रेणी में शामिल किया जाए। इससे उन्हें बेहतर मुआवजा
- मेडिकल सुविधा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
समय आ गया है सख्त कानून का
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक बड़ा संदेश है। एसिड अटैक सिर्फ शारीरिक हमला नहीं, बल्कि पीड़िता की पूरी जिंदगी बर्बाद करने वाला अपराध है। लक्ष्मी अग्रवाल, शाहीन मलिक जैसी हजारों सर्वाइवर्स आज भी न्याय और सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं। CJI की यह बात बिल्कुल सही है कि एसिड अटैक दहेज हत्या से कम नहीं है। अब जरूरत है केंद्र और राज्य सरकारों की तुरंत कार्रवाई की तेजाब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, तेज ट्रायल, आरोपी की संपत्ति जब्ती और पीड़ितों के लिए मजबूत पुनर्वास नीति की।
Read More : शंकराचार्य से प्रमाण मांगना गलत उमा भारती का बयान और विवाद की पूरी कहानी!