चंद्रपुर महापौर चुनाव : महाराष्ट्र की राजनीति में एक और चौंकाने वाला मोड़! चंद्रपुर नगर निगम के महापौर चुनाव में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी UBT ने अचानक भाजपा का साथ दिया, जिससे BJP की संगीता खांडेकर महापौर चुनी गईं। जबकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद महापौर पद गंवा बैठी। कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को सिर्फ एक वोट से हार का सामना करना पड़ा। इस घटना ने महाविकास आघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने तीखी नाराजगी जताई और पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
चुनाव परिणाम और गठबंधन का खेल
15 जनवरी 2026 को हुए चंद्रपुर महानगरपालिका चुनाव में कुल 66 सीटें थीं। कांग्रेस ने 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनी, जबकि भाजपा को 23, शिवसेना UBT को 6, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) को 3, वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) को 2 सीटें मिलीं। AIMIM, बसपा और शिवसेना (शिंदे गुट) को एक-एक सीट मिली, साथ ही दो निर्दलीय भी जीते।

- खंडित जनादेश के बाद महापौर पद के लिए गठबंधन की जद्दोजहद चली। कांग्रेस को उम्मीद थी
- कि शिवसेना UBT के 6 पार्षद उनके साथ आएंगे, लेकिन स्थानीय स्तर पर बातचीत टूट गई।
- शिवसेना UBT के जिलाध्यक्ष संदीप गिरहे ने बताया कि कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार से मुलाकात हुई
- लेकिन कांग्रेस ने 5 साल का महापौर पद देने से इनकार कर दिया। इसके बाद शिवसेना UBT
- ने ‘विकास के हित में’ भाजपा से समझौता किया। नतीजा: भाजपा की
- संगीता खांडेकर को 32 वोट मिले, कांग्रेस को 31। शिवसेना UBT के प्रशांत दानव उपमहापौर बने।
कांग्रेस की नाराजगी और आरोप
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “शिवसेना UBT MVA और INDIA गठबंधन की सहयोगी है। उम्मीद थी कि वे कांग्रेस का साथ देंगे, लेकिन उन्होंने भाजपा का समर्थन किया।” सपकाल ने खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और AIMIM, VBA को भी जिम्मेदार ठहराया। VBA के पार्षद मतदान में अनुपस्थित रहे, जिससे भाजपा को फायदा हुआ। सपकाल ने दावा किया कि अगर VBA ने कांग्रेस का साथ दिया होता तो नतीजा अलग होता।
कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी भी बड़ा कारण बनी। विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धोरकर (चंद्रपुर सांसद) के बीच पुरानी रंजिश ने पार्टी को कमजोर किया। कांग्रेस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शिवसेना UBT का फैसला केंद्रीय नेतृत्व से बिना चर्चा के लिया गया।
शिवसेना UBT का पक्ष
- शिवसेना UBT के स्थानीय नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने समझौता नहीं किया
- इसलिए भाजपा के साथ गए। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत और अंबादास दानवे ने पहले कहा था
- कि भाजपा का कभी समर्थन नहीं करेंगे। लेकिन चंद्रपुर में स्थानीय फैसला अलग रहा।
- भाजपा मंत्री संजय शिरसाट ने तंज कसा, “उद्धव ठाकरे की पार्टी के पार्षदों
- ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहते।”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वे विस्तृत जानकारी लेंगे। यह घटना महाराष्ट्र में MVA की एकता पर सवाल उठाती है, जहां शिवसेना UBT कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी है।
राजनीतिक प्रभाव और सबक
- यह चुनाव महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा ट्विस्ट है। जहां राज्य स्तर पर MVA विपक्ष में एकजुट है
- वहीं स्थानीय स्तर पर स्वार्थ हावी हो गए। कांग्रेस के लिए यह शर्मिंदगी है
- कि सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद सत्ता हाथ से निकल गई।
- भाजपा ने चतुराई से फायदा उठाया और शिवसेना UBT को उपमहापौर पद देकर गठबंधन मजबूत किया।
यह घटना राजनीतिक दलों के लिए सबक है कि गठबंधन में विश्वास और स्थानीय स्तर पर समन्वय कितना जरूरी है। चंद्रपुर में विकास के नाम पर नए समीकरण बने हैं, लेकिन विपक्षी एकता पर सवाल बने रहेंगे। आने वाले दिनों में MVA की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा तय है।
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