ओडिशा पुलिस SI भर्ती : ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में हुए बड़े घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 30 दिसंबर 2025 को 16 आरोपियों के खिलाफ प्रारंभिक चार्जशीट दाखिल कर दी। यह चार्जशीट भुवनेश्वर में CBI के विशेष जज के सामने पेश की गई। मुख्य आरोपी पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज के प्रमुख शंकर प्रुस्ती हैं, जिनके साथ अन्य ठेकेदार और सहयोगी शामिल हैं। CBI ने चार्जशीट में किसी भी उम्मीदवार का नाम नहीं लिया है, जो जांच की गंभीरता को दर्शाता है।
घोटाले का पूरा बैकग्राउंड
ओडिशा पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड (OPRB) ने SI भर्ती परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी कोलकाता की सेंट्रल PSU ITI लिमिटेड को सौंपी थी। परीक्षा 5 और 6 अक्टूबर 2025 को होनी थी। लेकिन ITI लिमिटेड ने काम सबलेट कर सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया, और मुख्य टास्क पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज को सौंपे गए, जिसके हेड शंकर प्रुस्ती हैं।

घोटाला सामने आने पर बेरहामपुर पुलिस ने 114 उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया था। स्पेशल कोर्ट ने 29 अक्टूबर को सभी को सशर्त जमानत दे दी। CBI ने जांच अपने हाथ में लेते हुए बेरहामपुर और गोलंथरा पुलिस स्टेशन के FIR संग्रहित किए। शुरुआती FIR में शंकर, मुना मोहंती और 118 अन्य का नाम था।
मुख्य आरोपी कौन हैं?
CBI की प्रारंभिक चार्जशीट में शामिल प्रमुख नाम:
- शंकर प्रुस्ती: पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के चीफ और मुख्य आरोपी।
- सुरेश नायक: सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर।
- मुना मोहंती: शंकर प्रुस्ती का करीबी सहयोगी।
- अरबिंद दास: शंकर का एक अन्य करीबी सहयोगी।
बाकी 12 आरोपियों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। CBI ने स्पष्ट किया कि जांच जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
CBI जांच की दिशा और महत्व
- यह घोटाला ओडिशा में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल उठाता है।
- परीक्षा से पहले ही पेपर लीक और मैनिपुलेशन के आरोप लगे थे। CBI ने टेक्निकल सब-कॉन्ट्रैक्टिंग
- की चेन को तोड़ा और ठेकेदारों की भूमिका पर फोकस किया। उम्मीदवारों को अभी राहत है
- क्योंकि चार्जशीट में उनका नाम नहीं है, लेकिन जांच में अगर सबूत मिले तो आगे कार्रवाई हो सकती है।
ओडिशा पुलिस भर्ती में ऐसे घोटाले युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हैं। CBI की सख्ती से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी। यह मामला सरकारी भर्तियों में टेक्नोलॉजी और ठेकेदारों की भूमिका पर नई बहस छेड़ेगा।