आशा भोसले गाने पाकिस्तान : पाकिस्तान के PEMRA ने जियो न्यूज को आशा भोसले के गाने और भारतीय फिल्म क्लिप्स दिखाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया। जानिए पूरा मामला, 2018 के सुप्रीम कोर्ट फैसले और पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया।
भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोसले के निधन पर पाकिस्तान में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आशा भोसले के रविवार को 92 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन के बाद पाकिस्तान के प्रसिद्ध न्यूज चैनल जियो न्यूज ने उनकी मौत की खबर प्रसारित की। खबर के दौरान आशा भोसले के लोकप्रिय भारतीय गाने और फिल्मों के दृश्य दिखाए गए।
इसके जवाब में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियो न्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। PEMRA ने इसे पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले का जानबूझकर उल्लंघन बताया।

आशा भोसले गाने पाकिस्तान क्या है पूरा मामला?
#आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल 2026 को हुआ। उनके अंतिम संस्कार में उनके गाने ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बजाए गए और राजकीय सम्मान के साथ उन्हें मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दी गई।
- जियो न्यूज ने रिपोर्टिंग में आशा भोसले की उपलब्धियों को याद करते हुए उनके कालजयी गीतों
- और भारतीय फिल्म क्लिप्स का इस्तेमाल किया। चैनल के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने
- कहा कि “प्रतिष्ठित कलाकारों की रिपोर्टिंग में उनकी रचनाओं को याद करना और सराहना
- करना हमेशा से एक परंपरा रही है। आशा भोसले जैसी दिग्गज
- गायिका के लिए उनके गीतों को साझा करना और भी जरूरी था।”
- लेकिन PEMRA ने इसे बर्दाश्त नहीं किया। नोटिस में कहा गया कि “जियो न्यूज द्वारा
- आशा भोसले की मौत की खबर के दौरान भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना
- पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है
- जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था।”
2018 का सुप्रीम कोर्ट फैसला और भारतीय कंटेंट पर बैन
पाकिस्तान में 2018 से भारतीय फिल्में, गाने, टीवी सीरियल और अन्य मनोरंजन सामग्री पर सख्त प्रतिबंध लगा हुआ है। इस फैसले के बाद पाकिस्तानी चैनलों को भारतीय कलाकारों के गाने या क्लिप्स दिखाने की अनुमति नहीं है। PEMRA इस प्रतिबंध को लागू करने वाला मुख्य नियामक निकाय है।
- अजहर अब्बास ने PEMRA के फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि “फिर भी पाकिस्तान
- का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक PEMRA इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।
- उन्होंने जोर देकर कहा कि कलाकार की मौत पर उनके कार्य को याद करना पूरी दुनिया में आम परंपरा है।
आशा भोसले: भारतीय संगीत की लीजेंड
आशा भोसले लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। उन्होंने मात्र 10 वर्ष की आयु में गायकी शुरू की और आठ दशकों के करियर में लगभग 12,000 गीत गाए। उनकी आवाज ने हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयां दीं।
उनके निधन पर भारत में शोक की लहर दौड़ गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आमिर खान, विक्की कौशल समेत कई हस्तियों ने अंतिम विदाई दी। उनके बेटे आनंद भोसले ने मुखाग्नि दी।
पाकिस्तान में भारतीय संगीत की लोकप्रियता vs सरकारी प्रतिबंध
आशा भोसले और लता मंगेशकर जैसे भारतीय गायकों के गाने पाकिस्तान में हमेशा से बेहद लोकप्रिय रहे हैं। कई पाकिस्तानी घरों में आज भी उनकी धुनें बजती हैं। लेकिन राजनीतिक तनाव और 2018 के फैसले के बाद मीडिया पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं।
- यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पाकिस्तान में भारत से नफरत की राजनीति कितनी गहरी है।
- कलाकारों की मौत पर भी सम्मान व्यक्त करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
- यह मामला मीडिया की आजादी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर सवाल उठाता है।
- कई लोग मानते हैं कि संगीत और कला को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।
- आशा भोसले का संगीत पूरे उपमहाद्वीप की साझा विरासत है
- लेकिन पाकिस्तान सरकार इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रही।
- जियो न्यूज अब PEMRA को अपना जवाब देगा। अगर जवाब संतोषजनक नहीं माना गया
- तो चैनल पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई हो सकती है।
आशा भोसले के निधन पर पाकिस्तान में जियो न्यूज को PEMRA का नोटिस मिलना भारत-पाकिस्तान संबंधों की वर्तमान स्थिति को साफ दर्शाता है। जहां भारत में आशा भोसले को राजकीय सम्मान मिला, वहीं पाकिस्तान में उनके गानों को प्रसारित करने पर चैनल को नोटिस थमा दिया गया।
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