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अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में घिरे: बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि से मचा हड़कंप

On: February 26, 2026 8:19 AM
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अविमुक्तेश्वरानंद यौन शोषण विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद में बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि के बाद सनसनी फैल गई है। मामले ने धार्मिक जगत और राजनीति में हलचल तेज कर दी है, जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद यौन शोषण विवाद

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बड़े विवाद में फंस गए हैं। यह मामला न केवल धार्मिक जगत को हिलाकर रख दिया है, बल्कि समाज में भी गहरी चिंता पैदा कर रहा है। आरोप हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित कुछ अन्य लोगों ने नाबालिग बटुकों (बाल शिष्यों) का यौन शोषण किया। यह विवाद महाकुंभ-2025 और माघ मेला-2026 के दौरान हुए कथित घटनाओं से जुड़ा है। अब पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि होने से पूरे मामले में हड़कंप मच गया है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज इस केस ने धार्मिक गुरुओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विवाद की जड़

यह पूरा विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान स्नान व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (जो कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में भी वादी हैं) ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में दो नाबालिग बटुकों के साथ यौन दुराचार हुआ। आशुतोष महाराज का दावा है कि गुरु दीक्षा और सेवा के नाम पर इन बच्चों को प्रताड़ित किया गया। उन्होंने बताया कि बटुकों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से लाकर आश्रम में रखा जाता था और फिर उन्हें आरोपी के सामने पेश किया जाता था।

प्रयागराज के झूंसी थाने में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर 21-22 फरवरी 2026 के आसपास एफआईआर दर्ज की गई। इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अज्ञात लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। आरोपों में पैठ वाले यौन हमले (penetrative sexual assault) का जिक्र है।

मेडिकल रिपोर्ट ने पलटी सारी कहानी

मामले में सबसे बड़ा अपडेट पीड़ित नाबालिग बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट से आया है। पुलिस ने 25-26 फरवरी 2026 को इन बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया। रिपोर्ट में जबरन यौन कृत्यों की पुष्टि हुई है, जिसे जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया को बताया कि मेडिकल जांच से बच्चों के साथ हुए कुकर्म की स्पष्ट पुष्टि हो गई है।

  • यह रिपोर्ट न केवल आरोपों को मजबूती दे रही है,
  • बल्कि आरोपी पक्ष की स्थिति को कमजोर भी कर रही है।
  • सूत्रों के अनुसार, दो नाबालिगों (एक 14 वर्षीय और दूसरा 17 वर्ष से थोड़ा अधिक)
  • के बयान भी मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो चुके हैं।
  • इन बयानों में आरोपी के नाम और घटनाओं का विस्तार से जिक्र है।
  • पुलिस अब अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश कर रही है,
  • क्योंकि कुछ दावों में 20 से अधिक नाबालिगों के शोषण का जिक्र आया है।

आरोपी पक्ष का बचाव और अग्रिम जमानत की कोशिश

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने इसे साजिश करार दिया और कहा कि पीड़ित बच्चे कभी उनके गुरुकुल में प्रवेश नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि यह राजनीतिक और व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है।

  • कुछ लोगों ने आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी आरोप लगाए हैं
  • कि उन्होंने लालच देकर झूठे केस बनवाया।
  • एक शाहजहांपुर निवासी ने दावा किया कि उन्हें स्वामी को फंसाने के लिए प्रलोभन दिया गया।
  • स्वामी ने इंटरव्यू में भी आरोपों पर नाराजगी जताई और जांच की मांग की।

समाज और संत समाज की प्रतिक्रिया

  • यह मामला धार्मिक जगत में सदमा पैदा कर रहा है।
  • कुछ संतों ने कहा कि ऐसे आरोप गुरुओं की छवि खराब करते हैं,
  • जबकि जांच पूरी होने तक इंतजार करना चाहिए।
  • उत्तराखंड के कुछ संतों ने भी प्रतिक्रिया दी है कि सन्यासियों को ऐसी हरकतों से दूर रहना चाहिए।
  • वहीं, समाज में बहस छिड़ गई है कि क्या धार्मिक पदों पर बैठे लोगों की जांच सख्त होनी चाहिए।

पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यह घटना समाज को याद दिलाती है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

निष्कर्ष

  • फिलहाल पुलिस जांच जारी है।
  • मेडिकल रिपोर्ट और बयानों के आधार पर अगले कदम उठाए जाएंगे।
  • अगर आरोप सिद्ध हुए तो यह धार्मिक जगत के लिए बड़ा झटका होगा।
  • वहीं, अगर साजिश साबित हुई तो शिकायतकर्ता पर कार्रवाई हो सकती है।

यह मामला हमें सिखाता है कि बच्चों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। समाज को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और सच्चाई सामने आने तक अफवाहों से बचना चाहिए। अंततः, अदालत ही फैसला करेगी कि सच क्या है। लेकिन इस बीच, बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट ने विवाद को नया आयाम दे दिया है और पूरे देश की नजरें प्रयागराज पर टिकी हैं।

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