नोएडा श्रमिक प्रदर्शन साजिश : 17 अप्रैल 2026 को नोएडा पुलिस ने नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शन को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए बड़ा खुलासा किया है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 11 अप्रैल को हुई पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना बाहरी तत्वों द्वारा रची गई थी।
पुलिस ने मुख्य आरोपी रूपेश राय (बिहार के छपरा का ऑटो चालक) और मनीषा चौहान (गोपालगंज, बिहार) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि आदित्य आनंद फरार है।

नोएडा श्रमिक प्रदर्शन साजिश कैसे रची गई?
#नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन (28 मार्च 2026) के बाद सुरक्षा सख्त होने के बावजूद तीनों आरोपी 31 मार्च को नोएडा पहुंचे। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिकों के वेतन बढ़ोतरी की खबर का फायदा उठाया।
- 9-10 अप्रैल को हरियाणा के वॉट्सऐप ग्रुप्स से डेटा लेकर नोएडा के फैक्ट्री वर्कर्स के तीन
- बड़े वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए। हर ग्रुप में 1000 से ज्यादा सदस्य थे। 10 अप्रैल की रात 2 बजे
- इन ग्रुप्स में क्यूआर कोड भेजकर लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया गया।
- 11 अप्रैल को जब श्रमिकों की अधिकांश मांगें पूरी हो गईं, तब भी आरोपियों ने पुलिस
- और प्रशासन के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए और हिंसा भड़काई।
पाकिस्तान-नेपाल कनेक्शन
- पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 13 अप्रैल को सोशल मीडिया (X) पर फैलाई गई
- भ्रामक खबरें (जैसे “6 मौत, 67 घायल” या “14 मौत, 32 घायल”) पाकिस्तान से संचालित
- अकाउंट्स से पोस्ट की गईं। ये अकाउंट भारत में बने थे लेकिन पिछले तीन महीनों से
- पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे और VPN का इस्तेमाल किया गया।
नेपाल कनेक्शन की भी जांच चल रही है। पुलिस का मानना है कि जब नक्सलवाद की कमर टूट रही है, तो शहरी नक्सल विचारधारा से जुड़े लोग औद्योगिक क्षेत्रों में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
आरोपी कौन हैं?
- रूपेश राय: मुख्य सूत्रधार, मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़ा। नोएडा में ऑटो चलाता था और मजदूरों को भड़काता था।
- मनीषा चौहान: तीनों वॉट्सऐप ग्रुप की एडमिन में शामिल।
- आदित्य आनंद: कई अन्य शहरों (दिल्ली, मानेसर, हैदराबाद) के प्रदर्शनों में सक्रिय, अभी फरार।
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सीसीटीवी और वॉट्सऐप चैट्स से पूरी साजिश का खुलासा किया।
नोएडा पुलिस की कार्रवाई
नोएडा पुलिस कमिश्नर ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्पेशल टीम गठित की। रूपेश राय और मनीषा चौहान को 11 अप्रैल की देर रात गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है और श्रमिक संगठनों से संवाद जारी रखे हुए है ताकि भविष्य में ऐसी साजिशें रोकी जा सकें।
असर और निष्कर्ष
नोएडा उत्तर प्रदेश का बड़ा औद्योगिक केंद्र है। ऐसी हिंसा से न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि निवेशकों का विश्वास भी डगमगाता है। पुलिस का कहना है कि श्रमिकों की वैध मांगें जायज हैं, लेकिन कुछ बाहरी तत्वों ने इसे हिंसक रूप देने की कोशिश की।
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