ट्रंप न्यूक्लियर कोड : वाशिंगटन – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। पूर्व CIA एनालिस्ट लैरी जॉनसन (Larry Johnson) ने दावा किया है कि ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर न्यूक्लियर हमला करने के लिए न्यूक्लियर कोड इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन (Gen. Dan Caine) ने उन्हें रोक दिया। यह दावा एक पॉडकास्ट में किया गया है और तेजी से वायरल हो रहा है।

#ट्रंप न्यूक्लियर कोड क्या कहा पूर्व CIA एनालिस्ट ने?
लैरी जॉनसन ने जज एंड्र्यू नैपोलिटानो के पॉडकास्ट ‘Judging Freedom’ में यह दावा किया। उन्होंने बताया कि शनिवार को व्हाइट हाउस में एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। इस मीटिंग में ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड एक्टिवेट करने की इच्छा जताई, ताकि ईरान पर न्यूक्लियर स्ट्राइक की जा सके।
जनरल डैन केन ने खड़े होकर साफ मना कर दिया और अपनी मिलिट्री अथॉरिटी का हवाला देते हुए कहा – “नहीं”। जॉनसन के अनुसार, इस पर दोनों के बीच काफी तीखी बहस हुई। जॉनसन ने कहा, “ट्रंप के साथ कुछ गंभीर समस्या है” (There is seriously something wrong with Trump)।
- यह दावा अभी तक किसी आधिकारिक स्रोत से कन्फर्म नहीं हुआ है।
- व्हाइट हाउस या पेंटागन की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।
- कई फैक्ट-चेकर्स ने कहा है कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
पृष्ठभूमि: ट्रंप और ईरान का तनाव
- ट्रंप प्रशासन ईरान की न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर काफी सख्त रुख अपनाए हुए है।
- ट्रंप ने पहले भी ईरान पर “मैक्सिमम प्रेशर” कैंपेन चलाई थी। हाल के दिनों में ईरान पर
- अमेरिकी सैन्य अभियान की चर्चा बढ़ गई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है
- कि ईरान अपना न्यूक्लियर कार्यक्रम तेज कर रहा है, जबकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में इसे लेकर अलग-अलग राय है।
ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बन रहा है। वहीं, पूर्व CIA एनालिस्ट का यह दावा इस तनाव को और बढ़ा रहा है। अगर दावा सही है तो यह दिखाता है कि अमेरिकी मिलिट्री लीडरशिप राष्ट्रपति के फैसलों पर भी ब्रेक लगा सकती है।
न्यूक्लियर कोड क्या होता है?
- अमेरिका में राष्ट्रपति के पास न्यूक्लियर वेपन लॉन्च करने का अंतिम अधिकार होता है।
- इसके लिए एक स्पेशल “न्यूक्लियर फुटबॉल” (Nuclear Football) बैग होता है
- जिसमें कोड और प्रोसीजर होते हैं। सामान्य रूप से राष्ट्रपति अकेले यह फैसला नहीं ले सकते।
- मिलिट्री चेन ऑफ कमांड और कई सेफ्टी चेक शामिल होते हैं। जनरल डैन केन के रूप में जॉइंट
- चीफ्स चेयरमैन का विरोध ऐसे फैसले को रोकने की कोशिश माना जा सकता है।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स और फैक्ट-चेकर्स?
यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, लेकिन कई मीडिया आउटलेट्स और फैक्ट-चेकर्स ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। Hindustan Times समेत कई स्रोतों ने रिपोर्ट किया कि शनिवार को पेंटागन में ऐसी कोई इमरजेंसी मीटिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
- कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि लैरी जॉनसन नियमित रूप से विवादास्पद कमेंट्री करते रहते हैं।
- इसलिए इस दावे को बिना सबूत के पूरी तरह मान लेना उचित नहीं होगा।
- वहीं, कुछ यूजर्स इसे ट्रंप की “अनप्रेडिक्टेबल” स्टाइल से जोड़ रहे हैं।
अमेरिका-ईरान संबंधों पर असर
- यह दावा अगर सही साबित हुआ तो अमेरिका की आंतरिक सिविल-मिलिट्री रिलेशन पर सवाल उठाएगा।
- साथ ही, ईरान के साथ चल रहे तनाव को और गंभीर बना सकता है। ईरान पहले से ही
- अमेरिका पर आरोप लगा रहा है कि वह उसके न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बना रहा है।
ट्रंप प्रशासन का फोकस ईरान के न्यूक्लियर ब्रेकआउट टाइम को रोकने पर है। लेकिन इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) और अमेरिकी इंटेलिजेंस की कुछ रिपोर्ट्स अभी भी ईरान के पूर्ण न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम को “इमिनेंट थ्रेट” नहीं मानतीं।
पूर्व CIA एनालिस्ट लैरी जॉनसन का दावा काफी गंभीर है, लेकिन फिलहाल यह अनवेरिफाइड है। अगर सच्चाई सामने आई तो यह अमेरिकी राजनीति और विदेश नीति दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है। दुनिया भर के लोग अब व्हाइट हाउस और पेंटागन के अगले बयान का इंतजार कर रहे हैं।
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