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केंद्र सरकार ने जारी किए वंदे मातरम के नए नियम राष्ट्रगान से पहले बजेगा पूरा 6 छंदों वाला संस्करण खड़े होना अनिवार्य जानिए पूरी गाइडलाइंस!

On: February 11, 2026 5:43 AM
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केंद्र सरकार : देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम (राष्ट्रीय गीत) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक आयोजनों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम का पूरा 6 छंदों वाला संस्करण (3 मिनट 10 सेकंड) बजाया या गाया जाएगा। इस दौरान सभी लोगों के लिए खड़े होना अनिवार्य होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान के समय होता है। यह आदेश 28 जनवरी 2026 को जारी 10 पेज के नोटिफिकेशन के तहत आया है और 11 फरवरी 2026 को मीडिया में प्रमुखता से छाया रहा।

नए नियम क्या हैं?

गृह मंत्रालय के अनुसार, वंदे मातरम अब कई मौकों पर अनिवार्य होगा:

  • राष्ट्रीय ध्वज फहराने (झंडोतोलन) के समय।
  • राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन, प्रस्थान, भाषण से पहले और बाद में।
  • राज्यपालों के आगमन और भाषण के मौके पर।
  • सिविलियन अवॉर्ड्स जैसे पद्म पुरस्कार समारोह में।
  • सरकारी स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में।
  • अगर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों एक साथ बजाए या गाए जाते हैं, तो वंदे मातरम पहले आएगा, उसके बाद जन गण मन।
केंद्र सरकार
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  • गीत की अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) होगी, जिसमें बैंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा
  • रचित सभी 6 छंद शामिल होंगे। पहले केवल पहले दो छंद ही आधिकारिक रूप
  • से इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब पूरा संस्करण अनिवार्य है।

खड़े होने का प्रोटोकॉल

  • वंदे मातरम बजते या गाते समय सभी व्यक्ति अटेंशन में खड़े रहेंगे।
  • यह नियम राष्ट्रगान के समान सम्मान देने के लिए है।
  • हालांकि, सिनेमा हॉल में फिल्मों से पहले बजने पर खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा (पहले की तरह)।

ये दिशानिर्देश देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति एकसमान सम्मान सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को इस आदेश की कॉपी भेज दी है।

क्यों आए ये नए नियम?

  • वंदे मातरम को 1882 में बैंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था और स्वतंत्रता संग्राम में यह क्रांतिकारियों का प्रमुख नारा बना।
  • 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया, लेकिन प्रोटोकॉल राष्ट्रगान जितना सख्त नहीं था।
  • अब सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर सम्मान देने का फैसला लिया है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है
  • कि यह कदम राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने और युवाओं में देशभक्ति जगाने के लिए है।

जनता और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं!

  • ये नियम जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं।
  • कई लोग इसे सराहनीय बता रहे हैं और कह रहे हैं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान से पहले
  • बजाना देश की मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वहीं कुछ विपक्षी नेता और समूहों ने इसे राजनीतिक कदम बताया।
  • लेकिन अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देगा।

केंद्र के इस फैसले से अब हर सरकारी कार्यक्रम में पहले वंदे मातरम सुनाई देगा, फिर जन गण मन। यह बदलाव देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हर भारतीय को इन नए नियमों का पालन करते हुए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का पूरा सम्मान करना चाहिए।

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