ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल : ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में एक दिल दहला देने वाला केस सामने आया है, जहां भारतीय मूल के 42 वर्षीय विक्रांत ठाकुर ने अपनी पत्नी सुप्रिया ठाकुर की मौत की जिम्मेदारी तो स्वीकार की, लेकिन अदालत में साफ कहा, “I killed my wife but it’s not murder” यानी “मैंने अपनी पत्नी को मार दिया, लेकिन यह कत्ल नहीं है।” उन्होंने दावा किया कि यह मर्डर ( premeditated murder) नहीं, बल्कि मैनस्लॉटर (गैर-इरादतन हत्या या उत्तेजना में हुई मौत) का मामला है। यह बयान 14 जनवरी 2026 को एडिलेड मजिस्ट्रेट कोर्ट में वीडियो लिंक के जरिए दिया गया, जहां विक्रांत हिरासत में थे।
घटना क्या हुई?
21 दिसंबर 2025 को एडिलेड के उत्तरी इलाके (नॉर्थफील्ड या आसपास) में सुप्रिया ठाकुर को उनके घर में अचेत अवस्था में पाया गया। पड़ोसियों ने घरेलू हिंसा की शिकायत पर पुलिस को बुलाया। पुलिस पहुंची तो सुप्रिया पहले ही मर चुकी थीं। सीपीआर की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मौके पर ही विक्रांत ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इसे घरेलू हिंसा से जुड़ी हत्या का मामला बताया। घटना के समय घर में एक और व्यक्ति मौजूद था, लेकिन वह सुरक्षित था और घायल नहीं हुआ।

सुप्रिया ठाकुर 36 वर्षीय भारतीय मूल की महिला थीं। वे एक नर्स थीं, जो अपने इकलौते बेटे के बेहतर भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करती थीं। दोस्तों और समर्थकों ने उनके बेटे के लिए GoFundMe पर फंड जुटाया, जहां सुप्रिया को एक मेहनती, केयरिंग और सपनों वाली मां बताया गया है। उन्होंने नर्स बनने का सपना देखा था और परिवार के लिए समर्पित थीं।
अदालत में क्या हुआ?
- 22 दिसंबर 2025 को विक्रांत की पहली पेशी हुई, जहां उन्होंने बेल नहीं मांगी और हिरासत में ही रहे।
- 14 जनवरी 2026 को दूसरी सुनवाई में उन्होंने वकील जेम्स मार्कस की सलाह पर बयान दिया:
- “I plead for manslaughter, but not guilty for murder.” यानी
- “मैं मैनस्लॉटर के लिए गिल्टी हूं, लेकिन मर्डर के लिए नहीं।” उनका तर्क है
- कि मर्डर में पूर्व नियोजन और इरादा होता है, जबकि मैनस्लॉटर में गुस्से, उत्तेजना या अचानक हुई
- घटना शामिल होती है, जिससे सजा कम हो सकती है।
वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, DNA और अन्य सबूत जुटाने के लिए सुनवाई 16 सप्ताह (अप्रैल 2026 तक) के लिए टालने की मांग की, जिसे मंजूर कर लिया गया। केस अब साउथ ऑस्ट्रेलिया के सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल के लिए जाएगा। विक्रांत फिलहाल हिरासत में हैं और बेल की अपील नहीं की गई।
भारतीय समुदाय और सामाजिक प्रभाव
- यह मामला भारतीय डायस्पोरा में सदमा पहुंचाने वाला है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय
- परिवार घरेलू हिंसा और मेंटल हेल्थ मुद्दों से जूझ रहे हैं। सुप्रिया की मौत ने घरेलू हिंसा
- के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई है। GoFundMe कैंपेन में दानकर्ताओं ने सुप्रिया को
- “एक अच्छी मां और मेहनती महिला” बताया है, जो बेटे के लिए सब कुछ करती थीं।
यह केस कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मर्डर और मैनस्लॉटर में सजा में बड़ा अंतर होता है। ऑस्ट्रेलियाई कानून में मर्डर के लिए आजीवन कारावास संभव है, जबकि मैनस्लॉटर में कम सजा मिल सकती है। अदालत अब सबूतों की जांच करेगी कि घटना पूर्व नियोजित थी या उत्तेजना में हुई।
- विक्रांत ठाकुर का यह बयान “मैंने मारा लेकिन मर्डर नहीं” दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।
- यह दिखाता है कि कैसे आरोपी अपनी सजा कम करने के लिए कानूनी दलीलें देते हैं।
- लेकिन सुप्रिया की मौत एक निर्दोष जीवन का अंत है, जिसने परिवार और बेटे को हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।
- जांच पूरी होने पर ही सच्चाई सामने आएगी। घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना और मदद मांगना जरूरी है।
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