एनसी विधायक : 3 फरवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन बड़ा राजनीतिक हंगामा हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायकों ने विधानसभा के बाहर धरना और सिट-इन प्रदर्शन किया। मुख्य मांग – जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना और घाटी के बाहर कश्मीरियों के साथ हो रहे उत्पीड़न को रोकना। यह प्रदर्शन एनसी की पुरानी मांग को फिर से जोरदार तरीके से उठाता है, खासकर 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से। KNS Kashmir और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आइए जानते हैं पूरी घटना, नेताओं के बयान, मांगें और राजनीतिक संदर्भ।
धरना का विवरण और प्रदर्शन
विधानसभा परिसर में एनसी विधायकों ने प्लेकार्ड्स लेकर प्रदर्शन किया। प्लेकार्ड्स पर नारे लिखे थे – “Restore Statehood”, “Restore Statehood and Constitutional Guarantees”, “Stop Harassing Kashmiris Outside J&K”। प्रदर्शन बजट सत्र के दौरान हुआ, जब विधानसभा में बहस चल रही थी। एनसी विधायकों ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई बार राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया, लेकिन कोई टाइमलाइन नहीं दी। अब “उचित समय” आ चुका है।

एनसी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने पत्रकारों से कहा, “अगर कोई फैसला देश के हित में है, तो हम समर्थन करेंगे। लेकिन यहां के अनसुलझे मुद्दों पर भी आवाज उठाएंगे। सबसे बड़ा मुद्दा राज्य का दर्जा बहाल करना है। केंद्र ने बार-बार ‘उचित समय’ कहा है, हम कहते हैं कि अब उचित समय आ गया है।”
- उन्होंने घाटी के बाहर कश्मीरियों के टारगेट होने, शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने
- जैसी घटनाओं पर चिंता जताई। कहा, “कश्मीरियों का बाहर उत्पीड़न या शैक्षणिक संस्थानों का बंद होना
- गंभीर चिंता का विषय है। इस प्रदर्शन से हम केंद्र सरकार को अपनी चिंताएं सुनाना चाहते हैं।”
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग क्यों?
- 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। तब से एनसी, कांग्रेस और अन्य पार्टियां राज्य का दर्जा बहाल
- करने की मांग कर रही हैं। ओमर अब्दुल्ला सरकार का कहना है कि दोहरी सत्ता (दिल्ली और स्थानीय)
- से प्रशासन में भ्रम और लोगों को परेशानी हो रही है। राज्य का दर्जा मिलने से मुख्यमंत्री
- की शक्तियां बढ़ेंगी, विकास तेज होगा और क्षेत्रीय असमानता कम होगी।
ओमर अब्दुल्ला ने पहले भी कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल न होने पर इस्तीफा दे सकते हैं। 2024 चुनावों में एनसी सबसे बड़ी पार्टी बनी और सरकार बनाई, लेकिन राज्य का दर्जा अभी भी नहीं मिला।
कश्मीरियों के उत्पीड़न पर चिंता
- प्रदर्शन में घाटी के बाहर कश्मीरियों के साथ भेदभाव और हमलों का मुद्दा प्रमुख था।
- एनसी ने कहा कि अन्य राज्यों में कश्मीरियों को टारगेट किया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
- यह मुद्दा सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। प्रदर्शन से केंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश है।
राजनीतिक संदर्भ और अन्य पार्टियों की प्रतिक्रिया!
- कांग्रेस: एनसी के साथ गठबंधन में है। कोई मतभेद नहीं, लेकिन राज्य का दर्जा सभी के लिए साझा मुद्दा है।
- बीजेपी: एनसी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे जम्मू में NLU जैसे छोटे मुद्दों पर शोर मचा रहे हैं
- लेकिन राज्य का दर्जा पर चुप हैं।
- अन्य: सीपीआई(एम) के एमवाई तारिगामी बीमार थे, लेकिन गठबंधन में समर्थन है।
विधानसभा में भी NLU (जम्मू में) की मांग पर हंगामा हुआ, लेकिन एनसी ने कहा कि बड़ा मुद्दा राज्य का दर्जा है।
यह धरना एनसी की पुरानी मांग को नई ताकत देता है। ओमर अब्दुल्ला सरकार बजट सत्र में विकास पर फोकस कर रही है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल न होने से चुनौतियां बनी हुई हैं। केंद्र से टाइमलाइन की मांग तेज हो गई है। अगर राज्य का दर्जा बहाल होता है, तो जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता और विकास को नई गति मिल सकती है। फिलहाल, यह प्रदर्शन राजनीतिक दबाव का हिस्सा है।