असम में हिंसा : असम के वेस्ट करबी आंग्लोंग जिले में 22 दिसंबर 2025 को भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। करबी आंग्लोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य (CEM) और भाजपा नेता तुलीराम रोंगहांग के पैतृक घर को उग्र भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। यह घटना चराई भूमि (ग्रेजिंग रिजर्व) से कथित अतिक्रमणकारियों की बेदखली की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान हुई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में पुलिस फायरिंग से एक पुलिसकर्मी सहित चार लोग घायल हो गए। दोनों जिलों में धारा 163 लागू कर दी गई है। इस ब्लॉग में हम इस घटना के कारण, घटनाक्रम और प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
प्रदर्शनों का कारण: चराई भूमि पर अतिक्रमण का विवाद
करबी समुदाय के लोग पिछले दो सप्ताह से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांग है कि खेरोनी इलाके के आसपास विलेज ग्रेजिंग रिजर्व (VGR) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व (PGR) से हिंदी भाषी लोगों (मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश मूल के) को बेदखल किया जाए। करबी आंग्लोंग छठी अनुसूची के तहत संरक्षित आदिवासी क्षेत्र है, जहां भूमि आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षित है।

फरवरी 2024 में KAAC ने 7,184 एकड़ से अधिक चराई भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किए थे, जिसमें करीब 10,000 लोगों (ज्यादातर हिंदी भाषी) को प्रभावित होना था। लेकिन गुवाहाटी हाई कोर्ट में मामला लंबित होने से बेदखली रुकी हुई है। प्रदर्शनकारी KAAC प्रमुख तुलीराम रोंगहांग पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा रहे हैं।
घटनाक्रम: कैसे भड़की हिंसा
सोमवार सुबह पुलिस ने भूख हड़ताल स्थल से 7 प्रदर्शनकारियों (महिलाएं शामिल) को हिरासत में लिया। इससे अफवाह फैली कि गिरफ्तारियां हुई हैं, जिससे गुस्सा भड़क उठा।
- 800-1000 लोगों की भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़े।
- सुरक्षा बलों पर पथराव किया।
- पुलिस ने काबू करने के लिए फायरिंग की, जिसमें 4 लोग घायल (एक पुलिसकर्मी सहित)।
- भीड़ ने डोंगकामुकाम में तुलीराम रोंगहांग के पैतृक घर (जहां वे नहीं रहते) को जला दिया।
- एक अन्य KAAC सदस्य पवन कुमार के घर पर हमला करने की कोशिश की गई, लेकिन सुरक्षा बलों ने रोका; उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई।
तुलीराम रोंगहांग ने इसे “गलतफहमी” बताया और शांति की अपील की। वे प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए जा रहे थे, तभी यह घटना हुई।
प्रशासन की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
- करबी आंग्लोंग और वेस्ट करबी आंग्लोंग में सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध (धारा 163 BNSS)।
- अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात।
- असम के DGP और मंत्री क्षेत्र में पहुंचे।
- हिंसा कुछ अन्य इलाकों में भी फैली, लेकिन अब काबू में।
- यह घटना आदिवासी भूमि अधिकारों और प्रवासियों के मुद्दे पर पुराने तनाव को उजागर करती है।
- करबी असम की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
शांति और संवाद की जरूरत
- यह हिंसा आदिवासी समुदाय की भूमि सुरक्षा की चिंता को दर्शाती है
- लेकिन आगजनी और झड़पें समाधान नहीं हैं। तुलीराम रोंगहांग ने संवाद का आश्वासन दिया है।
- उम्मीद है कि कोर्ट केस जल्द सुलझे और शांति बहाल हो। असम में ऐसे जातीय तनाव बार-बार सामने आते हैं
- इसलिए संवेदनशीलता से निपटना जरूरी है।