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विजया एकादशी 2026 13 फरवरी को रखें व्रत दुश्मनों पर विजय और सफलता की प्राप्ति! जानें तिथि समय पूजा विधि और कथा

On: February 12, 2026 5:33 AM
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विजया एकादशी 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें विजया एकादशी विशेष रूप से प्रसिद्ध है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और व्रत करने से जीवन में विजय, सफलता और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी श्री राम ने भी दुश्मनों पर जीत पाने के लिए की थी। पद्म पुराण और अन्य शास्त्रों में इसका वर्णन है। साल 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी (शुक्रवार) को रखा जाएगा।

विजया एकादशी 2026 की तिथि और समय (Vijaya Ekadashi Date & Time)

वैदिक पंचांग के अनुसार:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026 (गुरुवार) दोपहर 12:22 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) दोपहर 2:25 बजे
  • इस दिन दशमी युक्त होने के कारण 12 फरवरी को व्रत नहीं रखा जाता (गरुड़ पुराण में दशमी मिश्रित एकादशी से हानि का उल्लेख है)।
विजय एकादशी 2026 व्रत तिथि, पूजा विधि और महत्व
विजय एकादशी 2026 की तिथि, व्रत और पूजा विधि
  • इसलिए उदयातिथि के अनुसार व्रत 13 फरवरी 2026 को रखना उत्तम है, जो द्वादशी युक्त है।
  • पारण समय (व्रत तोड़ने का समय): 14 फरवरी 2026 (शनिवार) सुबह 7:00 बजे से 9:00-9:47 बजे तक (स्थानीय पंचांग से कन्फर्म करें)।

यह तिथि भारत भर में लगभग समान है, लेकिन स्थानीय पंचांग या पंडित से सलाह लें।

विजया एकादशी का महत्व (Mahatva)

यह व्रत विजय प्राप्ति के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा से शत्रु पराजित होते हैं, रुके काम पूरे होते हैं, और जीवन की हर बाधा दूर होती है। श्री राम ने लंका विजय से पहले इस व्रत का पालन किया था। व्रत रखने से नर्क से मुक्ति, मनोकामनाएं पूर्ण और आत्मबल बढ़ता है। कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

विजया एकादशी व्रत कथा (Vrat Katha)

  • पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्री हरि ने ऋषि को बताया कि फाल्गुन
  • कृष्ण पक्ष की एकादशी पर व्रत करने से विजय मिलती है। श्री राम ने रावण पर जीत के लिए यह व्रत किया।
  • एक अन्य कथा में राजा युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि विजया एकादशी कैसे फलदायी है।
  • कृष्ण ने बताया कि यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और मोक्ष प्रदान करता है।

पूजा विधि (Puja Vidhi Step-by-Step)

विजया एकादशी की पूजा भगवान विष्णु की विधिवत अर्चना से की जाती है:

  1. दशमी के दिन: सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश लें। जल भरें, आम के पत्ते डालें।
  2. ऊपर भगवान नारायण या विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
  3. एकादशी के दिन: सुबह स्नान करें। कलश को स्थिर जगह पर रखें।
  4. चंदन, फूल, माला, सुपारी, नारियल, सप्तधान्य (सात अनाज) और जौ चढ़ाएं।
  5. गंध, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) से पूजन करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  6. दिन भर कथा सुनें, भजन-कीर्तन करें। रात में जागरण रखें, घी का अखंड दीपक जलाएं।
  7. द्वादशी के दिन: सुबह सूर्योदय के बाद कलश को नदी/तालाब के पास ले जाएं।
  8. विधिवत पूजा कर ब्राह्मण को दान दें (कलश सहित वस्त्र, अनाज आदि)।
  9. मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ विष्णवे नमः” का जप करें।

व्रत के नियम और लाभ (Fasting Rules & Benefits)

  • क्या खाएं: फलाहार, दूध, फल, सब्जी (बिना अनाज के), या निर्जला व्रत (क्षमता अनुसार)।
  • क्या न खाएं: अनाज, दाल, नमक, मसाले, तामसिक भोजन।
  • लाभ: शत्रु नाश, सफलता, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि, पाप मुक्ति और विष्णु कृपा।

विजया एकादशी 2026 में 13 फरवरी को व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक बल देता है बल्कि जीवन में हर चुनौती पर विजय दिलाता है। अगर आप नियमित एकादशी व्रत रखते हैं तो यह विशेष फलदायी साबित होगा। शुभ मुहूर्त में पूजा करें और परिवार के साथ मनाएं।

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