यूपी की शिखा : हाल ही में UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के रिजल्ट के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली शिखा का मामला काफी चर्चा में रहा। शुरुआत में खबर आई कि शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन बाद में जांच में यह दावा गलत साबित हुआ।
दरअसल शिखा ने रिजल्ट की PDF में सिर्फ अपना नाम देखकर यह मान लिया कि उनका चयन हो गया है, जबकि उन्होंने रोल नंबर की जांच नहीं की थी। बाद में सामने आया कि 113वीं रैंक किसी दूसरी उम्मीदवार शिखा की थी।
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और मीडिया में काफी चर्चा हुई और पूरे मामले की सच्चाई सामने आई।

यूपी की शिखा क्या है पूरा मामला
UPSC सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। जब UPSC CSE 2025 का रिजल्ट घोषित हुआ, तब बुलंदशहर की शिखा ने दावा किया कि उन्होंने 113वीं रैंक हासिल की है।
- शिखा के इस दावे के बाद उनके गांव और आसपास के इलाके में खुशी का माहौल बन गया।
- परिवार और रिश्तेदारों ने मिठाइयां बांटीं और कई जगह उनका स्वागत भी किया गया।
- लेकिन बाद में पता चला कि UPSC की मेरिट लिस्ट में जिस
- शिखा का नाम 113वीं रैंक पर है, वह कोई और उम्मीदवार हैं।
- इस तरह शिखा का IAS बनने का दावा गलत साबित हुआ।
सिर्फ नाम देखकर कर दिया दावा
मामले के सामने आने के बाद शिखा ने खुद भी अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने बताया कि जब UPSC का रिजल्ट आया तो उन्होंने PDF में अपना नाम सर्च किया और नाम देखकर उन्हें लगा कि उनका चयन हो गया है।
उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने रोल नंबर की जांच नहीं की, जो उनकी सबसे बड़ी गलती थी।
उत्साह में उन्होंने तुरंत अपने परिवार को फोन करके बता दिया कि उनका चयन हो गया है।
कैसे खुली सच्चाई
- जब यह खबर सोशल मीडिया और मीडिया में फैलने लगी तो दूसरी उम्मीदवार
- जिनका वास्तव में 113वीं रैंक पर चयन हुआ था, उन्होंने इस पर आपत्ति जताई।
- बताया गया कि असली उम्मीदवार हरियाणा में ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर
- (BDPO) के पद पर कार्यरत हैं और उन्हीं का चयन हुआ था।
- इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई और पता चला कि बुलंदशहर
- की शिखा ने मुख्य परीक्षा भी पास नहीं की थी।
सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो गया।
कई लोगों ने इसे जल्दबाजी में किया गया दावा बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे एक बड़ी सीख बताया कि किसी भी रिजल्ट को पूरी तरह जांचने के बाद ही घोषणा करनी चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिखा के परिवार ने भी इस गलती के लिए खेद जताया।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
- UPSC जैसी बड़ी परीक्षाओं में कभी-कभी नाम समान होने के कारण भ्रम की स्थिति बन जाती है।
- ऐसा ही एक मामला पहले भी सामने आया था जब दो अलग-अलग उम्मीदवारों
- ने एक ही रैंक का दावा कर दिया था। बाद में जांच के बाद सही उम्मीदवार की पुष्टि की गई।
- इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि रिजल्ट चेक करते समय हमेशा रोल नंबर और अन्य डिटेल्स की पुष्टि करना जरूरी है।
छात्रों के लिए बड़ी सीख
इस घटना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है।
- रिजल्ट चेक करते समय सिर्फ नाम नहीं बल्कि रोल नंबर भी देखें
- आधिकारिक वेबसाइट से ही रिजल्ट की पुष्टि करें
- किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले दोबारा जांच करें
इस तरह की सावधानी से गलतफहमी और विवाद से बचा जा सकता है।
UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करना लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन बुलंदशहर की शिखा के मामले ने यह दिखा दिया कि कभी-कभी जल्दबाजी में की गई घोषणा बड़ी गलतफहमी पैदा कर सकती है।
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