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ट्रंप ईरान युद्ध ईरान से लड़ने में कंगाल हुआ अमेरिका? युद्ध के लिए अरब देशों से फंडिंग मांग सकते हैं ट्रंप!

On: March 31, 2026 3:12 AM
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ट्रंप ईरान युद्ध : की लागत इतनी बढ़ गई है कि अमेरिका अब अरब देशों से पैसे मांगने की तैयारी कर रहा है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष को एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर इसका भारी असर पड़ रहा है। क्या अमेरिका वाकई दिवालिया हो रहा है? ट्रंप प्रशासन अरब राष्ट्रों से युद्ध खर्च उठाने की अपील करने वाला है।

#ट्रंप ईरान युद्ध की बढ़ती लागत: अमेरिका पर बोझ

28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध ने अमेरिकी खजाने को काफी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती दिनों में ही पेंटागन ने कांग्रेस को बताया कि पहले छह दिनों में 11.3 बिलियन डॉलर (लगभग 94,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। अब यह आंकड़ा और बढ़ गया है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, युद्ध की कुल लागत 25-30 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है और अगर यह लंबा चला तो 200 बिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है।

ट्रंप ईरान युद्ध से जुड़ा तनाव और स्थिति
ट्रंप ईरान युद्ध अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और युद्ध की स्थिति

#ट्रंप प्रशासन ने पेंटागन के जरिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त मांग की है। घरेलू जरूरतें जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कम होने का खतरा मंडरा रहा है। तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड 115-116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले के मुकाबले करीब 60% ज्यादा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी 31% बढ़कर औसतन 3.84 डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं। इससे आम अमेरिकी नागरिकों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।

ट्रंप का प्लान: अरब देशों से फंडिंग की अपील

  • वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों
  • (खाड़ी राष्ट्रों) से युद्ध के खर्च में मदद मांगने में दिलचस्पी रखते हैं।
  • लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति उन्हें ऐसा करने के लिए कहने में काफी दिलचस्पी लेंगे।
  • यह विचार उनके मन में है और आप जल्द ही इससे जुड़ी और जानकारी सुनेंगे।”

ट्रंप सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उन्होंने ईरान को सख्त धमकी दी है कि अगर शीघ्र शांति समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत व्यापार के लिए नहीं खुला तो अमेरिका बड़े पैमाने पर कार्रवाई करेगा।

  • कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन खाड़ी देशों से 2.5 ट्रिलियन डॉलर
  • (युद्ध रोकने के लिए) या 5 ट्रिलियन डॉलर (जारी रखने के लिए) जैसी भारी रकम की मांग कर सकता है।
  • हालांकि, आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चाएं तेज हैं।
  • सऊदी अरब, यूएई जैसे देश पहले से अमेरिका में भारी निवेश कर चुके हैं
  • लेकिन युद्ध की वजह से उनकी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

ईरान का रुख: कोई समझौता नहीं, युद्ध का अंत हम तय करेंगे!

ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। मध्यस्थों के जरिए आए प्रस्ताव “अत्यधिक, अव्यावहारिक और तर्कहीन” हैं। ईरान का कहना है कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजरायल ने की, लेकिन इसका अंत ईरान तय करेगा।

  • खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फकारी
  • ने साफ कहा कि ईरानी सशस्त्र बल युद्ध शुरू नहीं करते, लेकिन संघर्ष का अंत कब और कैसे होगा
  • यह वे खुद तय करेंगे। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखे हुए है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

वैश्विक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां!

  • ईरान युद्ध ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है।
  • खाड़ी देशों में निवेश प्रभावित हो रहे हैं। तेल की ऊंची कीमतों से अफ्रीकी देशों
  • जैसे नाइजीरिया, सूडान में खाद्य संकट गहरा रहा है। स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
  • ट्रंप प्रशासन का दावा है कि बातचीत जारी है और जल्द समझौता हो सकता है।
  • लेकिन ईरान के सख्त रुख और बढ़ते खर्च को देखते हुए स्थिति जटिल बनी हुई है।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो अमेरिका को अपने सहयोगी देशों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

क्या ट्रंप अरब देशों को मनाने में सफल होंगे?

ट्रंप ईरान युद्ध अमेरिका के लिए महंगा साबित हो रहा है। अरब देशों से फंडिंग मांगना ट्रंप की नई रणनीति लग रही है। लेकिन खाड़ी राष्ट्र भी अपनी अर्थव्यवस्था बचाने में लगे हैं। क्या यह प्लान कामयाब होगा या युद्ध और बढ़ेगा? फिलहाल स्थिति अनिश्चित है।

दुनिया भर के नेता इस संघर्ष पर नजर बनाए हुए हैं। भारत समेत कई देश तेल की कीमतों और आपूर्ति पर असर को लेकर चिंतित हैं। शांति की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के सख्त बयानों से लगता है कि बातचीत अभी आसान नहीं।

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