थैंक यू इंडिया पोस्ट : मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनावपूर्ण युद्ध के बीच ईरान पर भारी संकट आया है। इस मुश्किल वक्त में भारत ने ईरान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भी बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता दी। लेकिन जब ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर भारत और कश्मीर को धन्यवाद दिया, तो पाकिस्तान के दबाव में पोस्ट डिलीट कर दिया गया। इस घटना ने भारत में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
थैंक यू इंडिया पोस्ट कश्मीरियों ने ईरान के लिए कैसे जुटाई मदद?
ईरान में युद्ध की वजह से आम लोगों पर आफत आई। भारत भर से मदद पहुंच रही थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर के शिया बहुल इलाकों – बडगाम, बारामुला और जदीबल – ने विशेष योगदान दिया।
लोगों ने अपने गहने, तांबे के बर्तन, मवेशी और यहां तक कि बच्चों की गुल्लकें तोड़कर पैसा दान किया। एक विधवा महिला ने अपने दिवंगत पति की 28 साल पुरानी सोने की निशानी (आखिरी यादगार) भी दान कर दी। घाटी से करोड़ों रुपये का फंड जुटाया गया और दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के एसबीआई बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया।

ईरानी दूतावास का मूल पोस्ट क्या था?
- ईरानी दूतावास ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट किया। इसमें वीडियो और तस्वीरें शेयर की गईं। कैप्शन में लिखा था:
- “हम कश्मीर के दयालु लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं
- जो ईरान के लोगों के साथ खड़े रहे। आपकी भावनाएं और आंसू हमारे लिए सबसे बड़ा सहारा हैं।
- यह दया कभी नहीं भुलाई जाएगी। Thank you #Kashmir. Thank you #India.”
- पोस्ट में साफ तौर पर कश्मीर को भारत का हिस्सा मानते हुए दोनों को धन्यवाद दिया गया।
- भारतीयों ने इस पोस्ट की सराहना की।
पाकिस्तान के दबाव में पोस्ट क्यों डिलीट हुआ?
पोस्ट अपलोड होने के कुछ ही देर बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स और ट्रोल्स ने इसे टारगेट कर दिया। उन्होंने स्पैम कमेंट्स किए – “कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है”, “ईरान को भारत का शुक्रिया नहीं अदा करना चाहिए” आदि।
- पाकिस्तान की तरफ से कूटनीतिक और सोशल मीडिया दबाव बढ़ा। नतीजा?
- ईरानी दूतावास ने मूल पोस्ट डिलीट कर दिया। फिर उसी वीडियो को दोबारा अपलोड किया
- लेकिन इस बार कैप्शन से “#India” और “Thank you India” पूरी तरह हटा दिया।
- अब केवल कश्मीर के लोगों को धन्यवाद बचा था।
यह कदम ईरान की कूटनीतिक मजबूरी को दिखाता है। एक तरफ भारत से भारी मदद ले रहे हैं, दूसरी तरफ पाकिस्तान के दबाव में झुक गए।
भारतीयों की प्रतिक्रिया: गुस्सा और सवाल
- भारतीय सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया। लोग ईरानी दूतावास के
- हैंडल पर कमेंट्स की बौछार कर रहे हैं। कई यूजर्स ने विदेश मंत्रालय को टैग किया
- और ईरान को सबक सिखाने की मांग की।
कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं:
- “जब बैंक अकाउंट में पैसा मंगाना था तब कश्मीर भारत का हिस्सा था, लेकिन शुक्रिया कहते वक्त नाम हटा दिया?”
- “महिलाओं के गहने और बच्चों की गुल्लकें लेने में कोई शर्म नहीं
- लेकिन भारत का नाम लिखने में पाकिस्तान से डर?”
- “अगर इतनी शर्म है तो सारा दान वापस कर दो।”
- लोग ईरान के दोहरे मापदंड पर सवाल उठा रहे हैं। जब फायदा लेना हो
- तो भारत से मदद, लेकिन कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानने में कायरता।
ईरान-भारत संबंधों पर क्या असर?
- भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं।
- चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाएं दोनों देशों को जोड़ती हैं।
- लेकिन इस घटना ने ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान दोनों तरफ संतुलन बनाए रखना चाहता है
- भारत से आर्थिक और मानवीय सहयोग, पाकिस्तान से इस्लामी एकजुटता।
- लेकिन इस तरह का दोगलापन दोस्ती को कमजोर करता है।
भारत ने हमेशा ईरान के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे हैं, भले ही अंतरराष्ट्रीय दबाव हो। लेकिन ऐसी घटनाएं भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाती हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और दुनिया को इसे स्वीकार करना चाहिए।
दोस्ती की सच्चाई क्या है?
यह घटना सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट की नहीं, बल्कि कूटनीति के दोगलेपन की मिसाल है। जब ईरान संकट में था, तब कश्मीरी और भारतीयों ने दिल खोलकर मदद की। लेकिन पाकिस्तानी ट्रोल्स के दबाव में शुक्रिया तक नहीं कहा जा सका।
भारत एक उदार राष्ट्र है। हम मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करते हैं, बिना किसी शर्त के। लेकिन हमें भी अपनी गरिमा और संप्रभुता का ध्यान रखना चाहिए। ईरान को समझना चाहिए कि सच्ची दोस्ती में साफ-सुथरे रिश्ते होते हैं, दबाव में झुकना नहीं।
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