पहला सोम प्रदोष व्रत : हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है सोम प्रदोष व्रत, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
साल 2026 का पहला सोम प्रदोष व्रत 16 मार्च 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और प्रदोष व्रत की कथा सुनते या पढ़ते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कथा पाठ करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

#सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
सोम प्रदोष व्रत को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय व्रत माना जाता है। इस दिन उपवास रखकर शिवलिंग का अभिषेक करने और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से सोम प्रदोष व्रत करते हैं, उनके पापों का नाश होता है
- और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। शिव पुराण के अनुसार प्रदोष काल
- में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
- इस दिन भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करते हैं
- तथा बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं।
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
- प्राचीन समय में एक नगर में एक गरीब ब्राह्मणी अपने छोटे पुत्र के साथ रहती थी।
- उसके पति का देहांत हो चुका था और वह भिक्षा मांगकर अपना जीवनयापन करती थी।
- ब्राह्मणी भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी और हर प्रदोष तिथि पर श्रद्धा से व्रत रखती थी।
- एक दिन जब वह भिक्षा मांगकर घर लौट रही थी, तब उसे रास्ते में एक घायल युवक मिला।
दयालु ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई और उसकी सेवा करने लगी। कुछ समय बाद पता चला कि वह युवक एक राज्य का राजकुमार है, जिसके पिता को शत्रुओं ने बंदी बना लिया था और उसका राज्य भी छीन लिया था।
कुछ समय बाद भगवान शिव की कृपा से राजकुमार का विवाह एक गंधर्व कन्या से हुआ। फिर गंधर्वराज की सहायता से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को परास्त कर अपने पिता को मुक्त कराया और अपना राज्य वापस प्राप्त कर लिया।
- राजकुमार ने ब्राह्मणी और उसके पुत्र का सम्मान किया और उन्हें अपने साथ रहने का निमंत्रण दिया।
- यह सब ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत और भगवान शिव की भक्ति के प्रभाव से संभव हुआ।
सोम प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
सोम प्रदोष व्रत को करने से कई आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- जीवन के कष्ट और दुख दूर होते हैं।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- मानसिक तनाव और चंद्र दोष से राहत मिलती है।
- स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- सोम प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- इसके बाद भगवान शिव की पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
पूजा विधि इस प्रकार है:
- पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।
- शिवलिंग पर जल और गंगाजल से अभिषेक करें।
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव मंत्रों का जाप करें।
- प्रदोष काल में व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में भगवान शिव की आरती करके प्रार्थना करें।
प्रदोष काल में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समय भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र अवसर है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखकर शिव पूजा करने और प्रदोष व्रत कथा पढ़ने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो सोम प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ जरूर करें।