SC NCERT किताब विवाद Supreme Court of India की सख्त टिप्पणी—“केस बंद नहीं होगा”—के बीच NCERT की किताबों पर बड़ी साजिश के आरोप। सुनवाई की अहम बातें, अदालत के सवाल और मामले का संभावित असर जानें।

हाल ही में भारत की न्यायपालिका और शिक्षा प्रणाली के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है, जो NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब से जुड़ा है। इस किताब में ‘न्यायपालिका में हमारा समाज की भूमिका’ (The Role of the Judiciary in Our Society) नामक अध्याय में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (corruption in judiciary) का जिक्र किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और खुद संज्ञान (suo motu cognizance) लेकर सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले को “गहरी जड़ों वाली साजिश” (deep-rooted conspiracy) करार दिया और साफ कहा कि केस बंद नहीं होगा। यह टिप्पणी न केवल न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा के लिए थी, बल्कि संस्थागत अखंडता पर हमले को बर्दाश्त न करने का संकेत भी देती है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
- फरवरी 2026 में NCERT ने कक्षा 8 के लिए नई सामाजिक विज्ञान किताब जारी की।
- इस किताब के एक अध्याय में न्यायपालिका की चुनौतियों के रूप में
- “न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार”, “मामलों का भारी बैकलॉग”,
- “न्यायाधीशों की कमी”, “जटिल कानूनी प्रक्रियाएं” और
- “खराब इंफ्रास्ट्रक्चर” का उल्लेख किया गया।
- किताब में यह भी बताया गया कि न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता है
- और गंभीर मामलों में संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया मौजूद है। हालांकि,
- सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, एएम सिंहवी और मुकुल रोहतगी जैसे
- वरिष्ठ वकीलों ने इसे कोर्ट में उठाया और कहा कि यह केवल न्यायपालिका को निशाना बना रहा है,
- जबकि राजनीति, नौकरशाही या व्यापार में भ्रष्टाचार का जिक्र नहीं है।
SC NCERT किताब विवाद : यह सामग्री कक्षा 8 के बच्चों के लिए है, जो 13-14 साल की उम्र के होते हैं। ऐसे में कोर्ट ने इसे “संस्थागत हमला” माना। CJI सूर्यकांत ने कहा, “हम किसी को भी संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे। न्यायपालिका आज लहूलुहान है। यह एक सुनियोजित, गहरी साजिश लगती है।”
सुप्रीम कोर्ट की सख्त कार्रवाई
- 25 फरवरी 2026 को कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
- अगले दिन 26 फरवरी को सुनवाई में CJI ने NCERT और शिक्षा मंत्रालय को फटकार लगाई।
- कोर्ट ने कहा कि यह “कैलकुलेटेड मूव” है,
- जिसका मकसद न्यायपालिका की छवि खराब करना है।
- सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कई बड़े आदेश दिए:
- किताब की छपाई, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध (blanket ban)।
- सभी भौतिक प्रतियों की जब्ती और डिजिटल कॉपियों को तुरंत हटाने का आदेश।
- NCERT के डायरेक्टर और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी,
- कि उनके खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई क्यों न हो।
- केंद्र सरकार ने बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन CJI ने कहा, “माफी काफी नहीं है।
- जिम्मेदार लोगों के सिर गिरने चाहिए।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर गंभीर कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई।
यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह मामला सिर्फ एक किताब का नहीं है। यह शिक्षा में तथ्यों की प्रस्तुति,
- संस्थाओं की आलोचना और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के बीच संतुलन का सवाल है।
- एक तरफ कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में है और बच्चों को वास्तविकता से अवगत कराना चाहिए।
- दूसरी तरफ कोर्ट का मानना है कि कक्षा 8 के स्तर पर ऐसी सामग्री बच्चों में संस्था के प्रति गलत धारणा पैदा कर सकती है,
- खासकर जब यह केवल एक संस्था को टारगेट करती हो।
CJI की टिप्पणी “केस बंद नहीं होगा” न्यायपालिका की स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान की रक्षा का प्रतीक है। यह दिखाता है कि शीर्ष अदालत किसी भी स्तर पर अपनी छवि को धूमिल होने नहीं देगी, चाहे वह सरकारी एजेंसी से ही क्यों न आए।
निष्कर्ष
NCERT किताब विवाद ने एक बार फिर साबित किया कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच को आकार देने का शक्तिशाली हथियार भी है। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि संस्थागत अखंडता पर कोई समझौता नहीं होगा। अब जांच होगी कि यह सामग्री कैसे और क्यों शामिल हुई। क्या यह लापरवाही थी या सच में कोई बड़ी साजिश? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, कोर्ट ने साफ कर दिया है – केस बंद नहीं होगा, और जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।