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S400 के बाद रूस का भारत को बड़ा ऑफर, S-500 और Su-57 पर नजर; 5 और S-400 देने का प्रस्ताव!

On: September 1, 2026 10:49 AM
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S400 के बाद रूस भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। रूस ने भारत के सामने S-500 एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट जैसे अत्याधुनिक हथियारों का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के लिए पांच और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम देने की पेशकश भी की गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत अपनी वायु सुरक्षा और लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रहा है।

S-400 के बाद रूस का भारत को बड़ा रक्षा ऑफर
S-400 के बाद रूस ने भारत को S-500, Su-57 और अतिरिक्त S-400 देने का प्रस्ताव दिया

रूस ने भारत को क्या-क्या ऑफर दिया?

रूस की ओर से भारत को रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा S-500 Prometheus एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 Felon फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट की हो रही है।

इसके अलावा रूस ने भारत के मौजूदा S-400 बेड़े को और मजबूत करने के लिए पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम की पेशकश की है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने भारत के उस टेंडर के जवाब में प्रस्ताव दिया है, जिसमें पांच और S-400 सिस्टम की जरूरत बताई गई थी।

हालांकि, इन प्रस्तावों को अभी अंतिम रक्षा सौदा मानना सही नहीं होगा। किसी भी बड़े सैन्य सौदे के लिए भारत में आवश्यक तकनीकी, वित्तीय और सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

S400 के बाद रूस ऑपरेशन सिंदूर के बाद S-400 की बढ़ी चर्चा

  • भारत के पास पहले से ही रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं।
  • इसकी क्षमता और प्रदर्शन को लेकर हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद चर्चा और बढ़ी है।
  • इसी पृष्ठभूमि में भारत के लिए पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • S-400 लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली है, जिसका उद्देश्य विमान, ड्रोन और मिसाइल
  • जैसे हवाई खतरों से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रक्षा करना है। भारत पहले ही इस सिस्टम की खरीद कर चुका है
  • और अब अतिरिक्त सिस्टम मिलने से देश की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।

S400 के बाद रूस क्यों है खास?

रूस का S-500 एक उन्नत एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। इसे रूस की अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक के तौर पर देखा जाता है। इसकी चर्चा विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइल और अत्यधिक तेज गति वाले हवाई खतरों से निपटने की क्षमता को लेकर होती है।

भारत यदि भविष्य में ऐसी प्रणाली खरीदने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इससे देश के मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करने की संभावना बन सकती है। हालांकि, भारत की ओर से S-500 की खरीद को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

Su-57 पर भी रूस की नजर

  • रूस ने भारत को Su-57 फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव भी दिया है।
  • भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की संख्या और आधुनिक तकनीक को लेकर
  • अपनी जरूरतों पर काम कर रही है। ऐसे में Su-57 का प्रस्ताव भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • रूस की पेशकश में केवल विमान बेचने की बात ही नहीं, बल्कि तकनीकी सहयोग और
  • उत्पादन से जुड़े विकल्पों की भी चर्चा सामने आई है। भारत के लिए किसी भी ऐसे प्रस्ताव
  • में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय उत्पादन और रखरखाव जैसे पहलू बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

भारत के लिए रूस का रक्षा बाजार क्यों महत्वपूर्ण है?

  • भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध कई दशकों पुराने हैं।
  • भारतीय सैन्य ढांचे में रूसी मूल के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, पनडुब्बियां, मिसाइल
  • और एयर डिफेंस सिस्टम लंबे समय से शामिल रहे हैं। इसी वजह से रूस के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा बाजार बना हुआ है।
  • हालांकि, भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा खरीद में विविधता लाने के साथ-साथ
  • आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।
  • ऐसे में रूस को अमेरिका, फ्रांस, इजरायल और भारतीय रक्षा उद्योग से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

मोदी-पुतिन मुलाकात और रक्षा सहयोग

  • SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर
  • पुतिन की मुलाकात भी हुई है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न रणनीतिक
  • मुद्दों पर बातचीत हुई। रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • फिलहाल S-500, Su-57 और पांच अतिरिक्त S-400 को लेकर रूस की पेशकश ने भारत के
  • रक्षा क्षेत्र में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। यदि इन प्रस्तावों में से किसी पर सहमति बनती है
  • तो इसका असर भारत की वायु सुरक्षा और भविष्य की सैन्य क्षमता पर पड़ सकता है।

रूस का S-500, Su-57 और पांच अतिरिक्त S-400 का प्रस्ताव भारत-रूस रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, अभी इन प्रस्तावों को अंतिम डील कहना जल्दबाजी होगी। भारत अपनी रणनीतिक जरूरतों, लागत, तकनीकी हस्तांतरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को ध्यान में रखकर किसी भी बड़े रक्षा सौदे पर फैसला करेगा।

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