PSLV sabotage जांच : भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चिंता का विषय! इसरो (ISRO) के विश्वसनीय ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) की लगातार दो विफलताओं ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। PSLV, जिसकी सफलता दर 1993 से 90% से अधिक रही है और इसने 350 से ज्यादा सैटेलाइट सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए हैं, अब बैक-टू-बैक फेलियर के कारण सुर्खियों में है। इन घटनाओं के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 3 फरवरी 2026 को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) का दौरा किया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति ‘प्रणालीगत मुद्दों’ (systemic issues), मैन्युफैक्चरिंग, खरीद प्रक्रियाओं और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की गहराई से जांच करेगी।
PSLV की हालिया विफलताएं: क्या हुआ था?
- 18 मई 2025: PSLV-C61 मिशन में तीसरा चरण प्रज्वलित नहीं हुआ। EOS-09 सैटेलाइट, जो सरकार की रणनीतिक जरूरतों के लिए था, पूरी तरह नष्ट हो गया।
- 12 जनवरी 2026: PSLV-C62 मिशन में भी तीसरा चरण फेल रहा। इस मिशन में 16 सैटेलाइट कक्षा में स्थापित करने थे, लेकिन रॉकेट समुद्र में जा गिरा।

दोनों मामलों में समस्या एक जैसी थी – तीसरे चरण में इग्निशन फेलियर। इन विफलताओं के बाद Failure Analysis Committee (FAC) बनाई गई, लेकिन इनकी रिपोर्ट्स सार्वजनिक नहीं की गईं। PSLV-C61 की रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई थी, लेकिन PSLV-C62 की जांच के बाद भी पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठे।
अजीत डोभाल का दौरा और जांच समिति का गठन
- 3 फरवरी 2026 को NSA अजीत डोभाल ने VSSC का कम प्रोफाइल दौरा किया।
- शुरुआती जांच में कोई साजिश (sabotage) का संकेत नहीं मिला, लेकिन प्रणालीगत
- और संगठनात्मक कमजोरियों पर फोकस किया गया। दौरे के तुरंत बाद सरकार ने दो
- सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं:
- के. विजयराघवन (पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रधानमंत्री को)
- एस. सोमनाथ (इसरो के पूर्व अध्यक्ष)
समिति में इसरो के बाहर के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यह थर्ड-पार्टी जांच होगी, जिसमें:
- मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाएं
- खरीद और सप्लाई चेन
- असेंबली और क्वालिटी कंट्रोल
- निजी कंपनियों की भागीदारी और जवाबदेही
समिति अप्रैल 2026 से पहले वर्तमान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सरकार और इसरो का बयान
- 2 फरवरी 2026 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
- “इसरो के पास विफलताओं की जांच की पूरी विशेषज्ञता है, लेकिन जनता और स्टेकहोल्डर्स
- के विश्वास के लिए थर्ड-पार्टी मूल्यांकन जरूरी है।” इसरो ने स्पष्ट किया कि PSLV की विश्वसनीयता बरकरार है
- कोई भी देश या कंपनी ने लॉन्च अनुरोध वापस नहीं लिया।
क्या हैं आगे की योजनाएं?
इसरो जून 2026 में अगला प्रक्षेपण करने की तैयारी कर रहा है। इस साल कुल 18 लॉन्च निर्धारित हैं, जिनमें 6 निजी क्षेत्र के सैटेलाइट शामिल हैं। अगले साल जापान, अमेरिका और फ्रांस के तीन बड़े विदेशी सैटेलाइट लॉन्च होने हैं। इन विफलताओं से इसरो की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन संगठन की मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड इसे संभाल सकता है।
यह जांच न केवल तकनीकी खामियों को दूर करेगी, बल्कि निजी क्षेत्र के साथ बढ़ते सहयोग में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। PSLV भारत का सबसे सफल रॉकेट रहा है – उम्मीद है कि यह जांच इसे और मजबूत बनाएगी। क्या इसरो जल्द ही अपनी पुरानी लय में लौटेगा? आने वाले महीनों में रिपोर्ट का इंतजार रहेगा।
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