Petrol Diesel Price Hike : भारत में पिछले चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अब एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बताया जा रहा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो सरकार और तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

Petrol Diesel Price Hike क्यों बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
हाल ही में मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। खासकर ईरान और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि यदि मिडिल ईस्ट का संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो सकता है।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
- सरकारी तेल कंपनियां जैसे Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum
- फिलहाल बाजार कीमत से कम दाम पर पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक इन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
बताया जा रहा है कि कंपनियां पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 14 रुपये तक का नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में लंबे समय तक पुराने दाम बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं।
सरकार अभी क्यों नहीं बढ़ा रही दाम?
- सरकार फिलहाल आम जनता को महंगाई से राहत देना चाहती है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ जाता है
- जिससे खाने-पीने की चीजों समेत लगभग हर सामान महंगा हो जाता है।
- इसी कारण सरकार और तेल कंपनियां अभी तक कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।
- हालांकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अचानक कोई बड़ा पेट्रोल प्राइस हाइक नहीं होगा।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
- अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
- महंगाई बढ़ सकती है, ट्रांसपोर्ट खर्च महंगा हो सकता है और आम लोगों का मासिक बजट बिगड़ सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया
- तो भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है
- और चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है।
पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल प्राइस, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और डीलर कमीशन शामिल हैं।
इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग होती है। उदाहरण के लिए वाराणसी में पेट्रोल की कीमत लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास चल रही है।
क्या आने वाले दिनों में और महंगा होगा तेल?
- विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है और तेल सप्लाई प्रभावित होती है
- तो आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
- हालांकि सरकार फिलहाल जनता पर बोझ कम रखने की कोशिश कर रही है।
- इसके अलावा भारत अब इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों
- पर भी तेजी से काम कर रहा है ताकि भविष्य में तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, मिडिल ईस्ट तनाव और तेल कंपनियों का बढ़ता नुकसान इसकी बड़ी वजह हैं। फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।