पाकिस्तान में तेल संकट : पाकिस्तान इन दिनों गंभीर तेल संकट का सामना कर रहा है। मिडिल ईस्ट में छिड़े ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और पाकिस्तान जैसे आयात पर निर्भर देश में ईंधन की भारी कमी हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि देश में शटडाउन जैसे हालात पैदा हो गए हैं। स्कूल-कॉलेज बंद, सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम, ईंधन और वेतन में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध से पाकिस्तान पर असर
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल जहाजों की आवाजाही रोक दी। यह जलडमरूमध्य दुनिया के 20-25% तेल व्यापार का मुख्य रास्ता है। युद्ध शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 60 डॉलर से बढ़कर 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। पाकिस्तान अपनी ज्यादातर ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत) से आयात करता है। आपूर्ति रुकने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। हाल ही में पेट्रोल 266 से बढ़कर 321 रुपये प्रति लीटर और डीजल 280 से 335 रुपये प्रति लीटर हो गया।

पाकिस्तान में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई जगहों पर जमाखोरी और अफरा-तफरी मची है। कुछ पेट्रोल पंपों पर तो गोलीबारी तक की खबरें आईं। देश के पास पेट्रोल-डीजल का स्टॉक सिर्फ 28 दिनों का बचा है, क्रूड ऑयल 10 दिनों का और एलपीजी 15 दिनों का। अगर संकट लंबा चला तो पेट्रोल पंप बंद होने लगेंगे।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कड़े फैसले
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, “युद्ध का असर सीमाओं से परे पड़ता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खाड़ी से तेल पर निर्भर है और कीमतें बढ़ने से मुश्किलें बढ़ गई हैं।” सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठाए:
- सरकारी वाहनों में ईंधन भत्ता 50% कम किया गया।
- 60% सरकारी वाहन दो महीने तक सड़कों से हटाए जाएंगे।
- कैबिनेट सदस्यों, सलाहकारों का दो महीने वेतन रोका जाएगा।
- संसद सदस्यों का वेतन 25% कटौती (दो महीने के लिए)।
- ग्रेड-20 और ऊपर के अधिकारियों के वेतन से दो दिन की कटौती।
- सरकारी खर्चों में 20% कमी।
- विदेश यात्राओं पर रोक, सिर्फ जरूरी यात्राएं।
- आधिकारिक इफ्तार पार्टियां और रात्रिभोज बंद।
- सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के 50% कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम।
- सरकारी दफ्तर सप्ताह में सिर्फ 4 दिन काम करेंगे (बैंकों को छोड़कर)।
- सभी स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद, उच्च शिक्षा में ऑनलाइन क्लासेज शुरू।
ये उपाय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हैं, लेकिन आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
आर्थिक प्रभाव और IMF पर खतरा
तेल संकट से महंगाई बढ़ रही है। निवेश का माहौल खराब हुआ है। पाक-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव के कारण IMF की अगली किस्त भी खतरे में है। IMF टीम पाकिस्तान में समीक्षा कर रही है, लेकिन बढ़ता सैन्य खर्च और आर्थिक फैसले IMF शर्तों के मुताबिक नहीं बैठ रहे। इससे कर्ज चुकाने में और मुश्किल होगी।
वैश्विक युद्ध का क्षेत्रीय असर
ईरान-अमेरिका युद्ध सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा। इसका खामियाजा पाकिस्तान जैसे देश भुगत रहे हैं। तेल संकट ने रोजमर्रा की जिंदगी ठप कर दी है। अगर युद्ध लंबा चला तो स्थिति और बिगड़ सकती है। पाकिस्तान सरकार कड़े कदम उठा रही है, लेकिन आम नागरिकों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दुनिया को जल्द शांति की जरूरत है, वरना ऊर्जा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है।