नीतीश कुमार के क्रांतिकारी : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल में ऐसे कई क्रांतिकारी फैसले लिए, जिन्होंने राज्य की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया। 2005 से लेकर अब तक नीतीश कुमार की नीतियों ने बिहार को “सुशासन” का पर्याय बनाया। महिलाओं का सशक्तिकरण, कानून व्यवस्था, शराबबंदी, ग्रामीण आजीविका और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में उनके निर्णय न केवल बिहार के लिए वरदान साबित हुए, बल्कि कई अन्य राज्यों ने भी इन्हें अपनाया। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्य पंचायती राज में महिलाओं के 50% आरक्षण और अन्य योजनाओं को कॉपी कर चुके हैं। आइए जानते हैं नीतीश कुमार के टॉप 10 क्रांतिकारी फैसलों के बारे में विस्तार से।

1. पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण
नीतीश कुमार ने देश में सबसे पहले बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी 55% तक पहुंच गई। इस फैसले की इतनी तारीफ हुई कि बाद में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने इसे अपनाया। यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।
2. सरकारी नौकरियों और शिक्षा में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण
- 2013 में बिहार पुलिस में 35% महिला आरक्षण लागू किया गया, जिसके बाद महिला
- पुलिसकर्मियों की संख्या 31 हजार से ज्यादा हो गई। 2016 से सभी सरकारी सेवाओं
- में 35% क्षैतिज आरक्षण और इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेजों में 33% लड़कियों के लिए आरक्षण दिया।
- इससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ी और बिहार में जेंडर इक्वालिटी का नया मॉडल बना।
3. जीविका योजना: ग्रामीण महिलाओं की आजीविका क्रांति
- 2006 में शुरू की गई जीविका योजना (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) ने एक
- करोड़ 40 लाख से ज्यादा महिलाओं को “जीविका दीदी” बनाया। 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता
- समूह (SHG) बने। इस मॉडल की सफलता देखकर केंद्र सरकार ने पूरे देश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- लागू किया। यह योजना गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है।
4. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना
2025 में शुरू इस योजना के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इच्छुक महिलाओं को 2 लाख तक अतिरिक्त सहायता मिल रही है। इससे आत्मनिर्भरता बढ़ी और महिलाओं में उद्यमिता का जोश आया।
5. कन्या उत्थान और जननी बाल सुरक्षा योजना
2008-09 में शुरू कन्या उत्थान योजना से जन्म पंजीकरण दर 54.9% से बढ़कर 60.7% हो गई। जननी बाल सुरक्षा योजना ने संस्थागत प्रसव को 4% से 50% से ज्यादा बढ़ाया। आशा और ममता कार्यकर्ताओं के माध्यम से माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
6. पूर्ण शराबबंदी: सामाजिक क्रांति
- 2 अक्टूबर 2016 (गांधी जयंती) से लागू पूर्ण शराबबंदी ने बिहार में घरेलू हिंसा 35-40% कम की
- महिलाओं की बचत बढ़ाई और अपराध दर घटाई। यह फैसला महिलाओं और परिवारों के लिए वरदान साबित हुआ।
- 7. कानून व्यवस्था में सुधार 2005 के बाद स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग से
- बाहुबलियों पर लगाम लगी। लोग रात में भी सुरक्षित सड़कों पर निकलने लगे।
- बिहार की “जंगलराज” वाली छवि पूरी तरह बदली।
8. बाल विवाह और दहेज के खिलाफ अभियान
2017 से शुरू अभियान में ढाई करोड़ लोगों ने शपथ ली। नारी शक्ति योजना के तहत 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन शुरू की गई। बाल विवाह दर में भारी कमी आई।
9. अक्षर अंचल योजना: पिछड़े वर्ग की साक्षरता
2009-10 से चली इस योजना से 67 लाख से ज्यादा महिलाएं साक्षर हुईं। महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ों को भी जोड़ा गया। बिहार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
10. हुनर और औजार कार्यक्रम
अल्पसंख्यक लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और टूल-किट देकर स्वरोजगार शुरू कराया। महादलित टोलों में विकास मित्र बहाल किए गए।
नीतीश कुमार के ये फैसले बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले गए। महिलाओं का सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और कानून का राज उनकी प्रमुख उपलब्धियां हैं। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने इन मॉडलों को अपनाकर अपनी नीतियां मजबूत कीं। बिहार अब एक प्रेरणा स्रोत बन चुका है।