Monsoon Delay 2026 : देशभर में लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए मानसून का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार मानसून की एंट्री में देरी देखने को मिल रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर नया अपडेट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि मानसून केरल पहुंचने में पहले की तुलना में अधिक समय ले सकता है। इससे कई राज्यों में गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है।
IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में सामान्य समय से देरी से पहुंच सकता है। पहले मानसून के मई के अंतिम सप्ताह में पहुंचने की संभावना जताई गई थी, लेकिन मौसम की परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण इसकी तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। अब मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून 3 जून के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है।

भारत में मानसून की एंट्री कब होगी?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही मौसमी परिस्थितियों के कारण मानसून की गति प्रभावित हुई है। यही वजह है कि इसके आगे बढ़ने में देरी हो रही है।
Monsoon Delay 2026 ने क्यों जताई चिंता?
- भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के मानसून को लेकर संशोधित पूर्वानुमान जारी किया है।
- विभाग के अनुसार इस वर्ष देश में जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
- IMD ने मानसून वर्षा को दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90% रहने का अनुमान लगाया है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो (El Niño) की स्थिति मानसून को प्रभावित कर सकती है।
- यही कारण है कि कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और अधिक गर्मी देखने को मिल सकती है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
- IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में
- सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वहीं पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश हो सकती है।
- दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में जून महीने
- के दौरान हीटवेव का खतरा बना रह सकता है। मौसम विभाग ने
- कई क्षेत्रों में अधिक तापमान और कम वर्षा की संभावना जताई है।
किसानों के लिए बढ़ सकती है चिंता
- भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है।
- यदि मानसून कमजोर रहता है या बारिश में देरी होती है तो खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है।
- धान, दालें, सोयाबीन और तिलहन जैसी फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई
- तो कृषि उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है।
- इससे खाद्यान्न कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
मुंबई और दक्षिण भारत में बारिश की शुरुआत
हालांकि मानसून की आधिकारिक एंट्री में देरी हो रही है, लेकिन देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। मुंबई में हाल ही में प्री-मानसून बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। IMD ने आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारों की संभावना जताई है।
इसके अलावा केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं।
क्या इस साल कमजोर रहेगा मानसून?
- IMD के अपडेट के अनुसार इस बार मानसून पिछले कई वर्षों की तुलना में कमजोर रह सकता है।
- विभाग ने बताया है कि देश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना अधिक है।
- कुछ रिपोर्ट्स में इसे पिछले 11 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून भी बताया गया है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञ लगातार परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं और आने वाले हफ्तों में नए अपडेट जारी किए जाएंगे। यदि समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव होता है तो मानसून की स्थिति में सुधार भी संभव है।
भारत में मानसून की एंट्री इस बार सामान्य समय से देरी से होने जा रही है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मानसून केरल में जून के पहले सप्ताह में पहुंच सकता है। साथ ही देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और अधिक गर्मी की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों, आम नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की नजर मौसम विभाग के अगले अपडेट पर बनी हुई है।
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