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मतदाता सूची संशोधन पश्चिम बंगाल में जन्म प्रमाण पत्र की गड़बड़ियां जन्म से पहले जारी सर्टिफिकेट और भाई-बहनों में सिर्फ एक महीने का अंतर!

On: February 13, 2026 5:59 AM
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मतदाता सूची संशोधन : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान कई चौंकाने वाली और वैज्ञानिक रूप से असंभव गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें सबसे बड़ा खुलासा जन्म प्रमाण पत्रों से जुड़ा है, जहां कुछ मामलों में सर्टिफिकेट जन्म से पहले ही जारी हो गए, जबकि कुछ परिवारों में सगे भाई-बहनों की जन्म तिथियों में महज एक महीने का अंतर दिख रहा है। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर रहा है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों और मतदाता सूची में हेराफेरी की आशंका को भी बढ़ा रहा है।

कोलकाता के मेटियाब्रुज में परिवार का बड़ा खुलासा

कोलकाता के बाहरी इलाके मेटियाब्रुज में एक परिवार के 10 सदस्यों के दस्तावेजों की जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इस परिवार में दो सगे भाइयों – इरशाद और शेख नउसद की जन्म तिथियां क्रमशः 5 दिसंबर 1990 और 1 जनवरी 1991 दर्ज हैं। यानी दोनों के जन्म में सिर्फ 26-27 दिन का अंतर है, जो सामान्य रूप से असंभव है।

मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की जानकारी
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सुधार की प्रक्रिया

परिवार के कुल 10 बच्चों में से चार बच्चों की जन्म तिथि 1 जनवरी ही दर्ज है। मां का नाम सभी में मनोवारा बीबी एक समान है, लेकिन पिता का नाम अलग-अलग दस्तावेजों में बदलता मिला। यह स्पष्ट रूप से दस्तावेजों में हेरफेर या गलत एंट्री की ओर इशारा करता है।

जन्म से पहले जारी बर्थ सर्टिफिकेट का मामला

  • उत्तर 24 परगना जिले के बारांनगर में एक व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र और भी हैरान करने वाला है।
  • व्यक्ति का जन्म 6 मार्च 1993 को हुआ, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र 4 मार्च 1993 को ही
  • जारी कर दिया गया – यानी जन्म से दो दिन पहले! यह पूरी तरह से असंभव है,
  • क्योंकि कोई भी प्रमाण पत्र जन्म घटित होने से पहले नहीं बन सकता।

ऐसे कई अन्य मामले भी SIR जांच में सामने आए हैं, जैसे:

  • एक मतदाता को 2002 की वोटर लिस्ट में सिर्फ 5 साल की उम्र में दिखाया गया।
  • किसी अन्य की उम्र महज 13 साल दर्ज पाई गई, जो वोटर होने के लिए न्यूनतम आयु से कम है।
  • पूर्व बर्धमान के मेमारी में अलाउद्दीन शेख के फॉर्म में जन्म तिथि X/X/1987 जैसी अधूरी और संदिग्ध एंट्री मिली।

SIR अभियान क्यों चल रहा है और क्या हो रहा है जांच?

चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए SIR अभियान शुरू किया है। इसमें 8,000 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर्स और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) काम कर रहे हैं।

  • संदिग्ध मामलों को ERO को सत्यापन के लिए भेजा जा रहा है। कई मामलों में अस्पताल
  • रिकॉर्ड से क्रॉस-चेकिंग की जा रही है। अगर गड़बड़ी साबित हुई
  • तो फर्जी या अयोग्य नामों को सूची से हटाया जाएगा।
  • यह अभियान फर्जी वोटरों, डुप्लिकेट एंट्री और गैर-कानूनी प्रवासियों के
  • नाम हटाने के उद्देश्य से चल रहा है, जिससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़े।

जन्म प्रमाण पत्र की गड़बड़ियों के क्या कारण हो सकते हैं?

  • पुरानी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में लापरवाही या मैनुअल एंट्री की गलतियां।
  • कुछ मामलों में जानबूझकर फर्जी दस्तावेज बनवाकर वोटर आईडी या अन्य लाभ लेने की कोशिश।
  • परिवारों द्वारा उम्र या तिथि में बदलाव कर सरकारी योजनाओं का फायदा उठाना।
  • पश्चिम बंगाल में पहले भी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों में मनमाने बदलाव की शिकायतें रही हैं, जिसके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

सही दस्तावेज जरूरी क्यों?

जन्म प्रमाण पत्र न सिर्फ पहचान का आधार है, बल्कि स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट, नौकरी, सरकारी योजनाओं और नागरिकता साबित करने के लिए भी अनिवार्य होता है। पश्चिम बंगाल SIR के दौरान सामने आए ये मामले बताते हैं कि दस्तावेजों की सत्यता कितनी महत्वपूर्ण है।

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