LPG Supply Crisis MSME : भारत में LPG गैस की सप्लाई को लेकर नई चिंता सामने आई है। ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने सरकार से अपील की है कि MSME सेक्टर की फाउंड्री और फोर्जिंग यूनिट्स के लिए LPG और PNG गैस की सप्लाई में अचानक कटौती न की जाए।
यह अपील ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की ओर से की गई है। संगठन ने कहा है कि अगर गैस सप्लाई में अचानक रुकावट आती है तो इससे उत्पादन, एक्सपोर्ट और छोटे उद्योगों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्यों उठी LPG सप्लाई को लेकर चिंता!
हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ रहा है। इससे गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इसी कारण भारत में भी गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि MSME सेक्टर की कई फाउंड्री और फोर्जिंग यूनिट्स अपने उत्पादन के लिए LPG और PNG गैस पर निर्भर हैं। अगर सप्लाई कम हो जाती है तो उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है।
MSME सेक्टर के लिए क्यों जरूरी है गैस
भारत में ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSME सेक्टर से जुड़ा हुआ है।
इन उद्योगों में कई प्रक्रियाओं के लिए लगातार उच्च तापमान की जरूरत होती है, जिसके लिए LPG और PNG गैस का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि गैस सप्लाई में बाधा आती है तो:
- उत्पादन कम हो सकता है
- फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है
- निर्यात ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं
- हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर असर पड़ सकता है
इसलिए इंडस्ट्री संगठनों ने सरकार से गैस सप्लाई जारी रखने की मांग की है।
ACMA ने सरकार से क्या मांग की
ACMA ने भारी उद्योग मंत्रालय को लिखे पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।
मुख्य मांगें:
- MSME फाउंड्री और फोर्जिंग यूनिट्स के लिए LPG/PNG सप्लाई जारी रखी जाए
- गैस सप्लाई में कटौती से पहले उद्योगों को तैयारी का समय दिया जाए
- वैकल्पिक ईंधन अपनाने के लिए ट्रांजिशन पीरियड दिया जाए
- निर्यात करने वाले MSME उद्योगों को वित्तीय सहायता दी जाए
ACMA के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे समय में सरकार का सहयोग जरूरी है।
एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी बढ़ा दबाव
इंडस्ट्री संगठनों ने यह भी बताया है कि वर्तमान समय में एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी काफी दबाव बढ़ गया है।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कई शिपिंग कंपनियों को रेड सी मार्ग से बचते हुए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
इससे:
- शिपिंग लागत 20% से 40% तक बढ़ गई है
- डिलीवरी समय 2 से 4 सप्ताह तक बढ़ गया है
- कई कंपनियों के ऑर्डर में देरी हो रही है
इन कारणों से ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने LPG सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाए कदम
- सरकार ने LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं
- ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।
- इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं के लिए गैस सप्लाई
- को प्राथमिकता देने की भी योजना बनाई जा रही है।
इंडस्ट्री को क्यों चाहिए सरकारी समर्थन
ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का कहना है कि अगर गैस सप्लाई में अचानक कटौती होती है तो MSME सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है।
इसलिए सरकार से मांग की गई है कि:
- निर्यात पर मिलने वाली RoDTEP स्कीम का लाभ फिर से बढ़ाया जाए
- एक्सपोर्ट क्रेडिट पर ब्याज सब्सिडी दी जाए
- छोटे उद्योगों को वर्किंग कैपिटल सपोर्ट मिले
इन कदमों से MSME सेक्टर को मौजूदा संकट से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने सरकार से अपील की है कि MSME सेक्टर के लिए LPG और PNG गैस की सप्लाई में अचानक कटौती न की जाए।
Read More : Narzo 90 5G खरीदने का मौका जो शायद दोबारा न मिले – इतनी छूट केवल आज के लिए!