जस्टिस सूर्यकांत न्यूज : भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक बार फिर क्रिकेट के माध्यम से जीवन और पेशेवर सफलता का गहरा संदेश दिया है। हाल ही में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) के 16वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने युवा कानून छात्रों और वकीलों को स्पेशलाइजेशन (विशेषज्ञता) की अहमियत बताई। उन्होंने टी20 क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि सफल टीम तब बनती है, जब हर खिलाड़ी अपनी ताकत के हिसाब से भूमिका निभाए।
जस्टिस सूर्यकांत न्यूज CJI सूर्यकांत का मजेदार क्रिकेट उदाहरण
CJI सूर्यकांत ने कहा, “कोई भी उम्मीद नहीं करता कि सूर्यकुमार यादव डेथ ओवर्स में गेंदबाजी करें। इसी तरह कोई यह उम्मीद नहीं करता कि जसप्रीत बुमराह रन चेज करते हुए बल्लेबाजी में सबसे आगे रहें और मैच फिनिश करें।” उन्होंने आगे जोड़ा कि कामयाब टीमें इस आधार पर नहीं बनतीं कि हर खिलाड़ी हर चीज में माहिर हो। बल्कि, खिलाड़ियों को उनकी स्पेशल स्किल्स के आधार पर जिम्मेदारी दी जाती है।

यह टिप्पणी उन्होंने 28 फरवरी 2026 को गांधीनगर में GNLU के कन्वोकेशन में की। CJI ने छात्रों को सलाह दी कि वकालत के पेशे में भी यही सिद्धांत लागू होता है। वकील सभी क्षेत्रों में एक्सपर्ट नहीं बन सकते। उन्हें अपनी ताकत पहचाननी चाहिए और उसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिए।
वकालत में स्पेशलाइजेशन क्यों जरूरी?
- CJI सूर्यकांत ने कहा, “कानून का पेशा उन लोगों को शायद ही कभी इनाम देता है
- जो हर काम को बराबर करने की कोशिश करते हैं।” उन्होंने बार एंड बेंच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए
- बताया कि बड़े वकील सब कुछ करने की कोशिश में ऊंचे पद तक नहीं पहुंचते।
- बल्कि, जो वकील अपनी क्षमता के अनुसार फोकस करते हैं
- वे ही सबसे ज्यादा सुकून और आत्मविश्वास के साथ काम करते हैं।
उन्होंने युवा वकीलों से अपील की कि करियर की शुरुआत में ही खुद से यह सवाल पूछें – “मैं इस पेशे में कहां फिट बैठता हूं?” यह सवाल बार-बार पूछना जरूरी है। CJI ने जोर दिया कि वकालत में सफलता उपलब्धियों से ज्यादा विश्वसनीयता और मुश्किल समय में स्थिरता पर निर्भर करती है।
क्रिकेट और कानून: समानताएं क्या हैं?
CJI का यह उदाहरण बेहद प्रासंगिक है क्योंकि टी20 क्रिकेट में स्पेशलाइजेशन बहुत साफ दिखता है:
- सूर्यकुमार यादव जैसे बल्लेबाज मिडिल ऑर्डर में विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर हैं, लेकिन डेथ ओवर बॉलिंग उनकी स्पेशलिटी नहीं।
- जसप्रीत बुमराह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में से एक हैं
- लेकिन बल्लेबाजी में रन चेज लीड करने की उम्मीद उनसे नहीं की जाती।
इसी तरह वकालत में:
- कुछ वकील क्रिमिनल लॉ में एक्सपर्ट होते हैं।
- कुछ कॉर्पोरेट लॉ, टैक्सेशन, या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी में माहिर।
- सभी क्षेत्रों में महारत हासिल करने की कोशिश करने वाले अक्सर पीछे रह जाते हैं।
युवा वकीलों के लिए CJI की मुख्य सलाह
- अपनी ताकत पहचानें और उसी पर फोकस करें।
- दिखावा बंद करें और असली वकालत शुरू करें।
- पेशा उपलब्धि नहीं, बल्कि विश्वसनीयता मांगता है।
- टीम वर्क और रोल क्लैरिटी से ही सफलता मिलती है।
यह भाषण ऐसे समय में आया है जब युवा लॉ ग्रेजुएट्स कॉर्पोरेट फर्म्स में ज्यादा जा रहे हैं। CJI ने चिंता जताई कि अगर 93% छात्र बार और बेंच के बजाय कॉर्पोरेट में चले जाते हैं, तो न्याय व्यवस्था कमजोर होगी।
CJI सूर्यकांत की यह बातें न सिर्फ कानून के छात्रों के लिए, बल्कि हर प्रोफेशनल के लिए प्रेरणादायक हैं। स्पेशलाइजेशन आज के दौर में सफलता की कुंजी है – चाहे क्रिकेट हो या वकालत।
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