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ईरान इजराइल हमला ईरान ने चीन को फोन पर बता दी युद्ध की डेडलाइन जब तक अमेरिका-इजराइल को पछतावा नहीं, जवाबी हमले जारी!

On: March 25, 2026 5:18 AM
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ईरान इजराइल हमला : पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान ने चीन से सीधे संपर्क कर अमेरिका (वाशिंगटन) और इजराइल (तेल अवीव) के खिलाफ अपनी सख्त रणनीति बता दी है। ईरान का साफ संदेश है – जब तक दुश्मन को अपनी आक्रामकता पर पछतावा नहीं होता और सभी मकसद हासिल नहीं हो जाते, तब तक जवाबी कार्रवाई नहीं रुकेगी।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चीनी समकक्ष वांग यी से फोन पर बात की और अमेरिका-इजराइल के हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह बताया। आइए जानते हैं इस महत्वपूर्ण फोन कॉल की पूरी डिटेल, ईरान का स्टैंड और वैश्विक प्रभाव।

ईरान इजराइल हमला से जुड़ी ताज़ा खबर और स्थिति
#ईरान इजराइल हमला ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव और हमला

ईरान-चीन फोन बातचीत: क्या कहा अराघची ने?

25 मार्च 2026 को हुई इस बातचीत में ईरान ने चीन को विस्तार से जानकारी दी। अब्बास अराघची ने कहा:

“ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा तब तक करेगा, जब तक कि सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते और दुश्मन को अपनी हिंसक आक्रामकता पर पछतावा करने के लिए मजबूर नहीं कर दिया जाता।”

  • ईरान ने फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ रही असुरक्षा को अमेरिका-इजराइल के हमलों से जोड़ा।
  • ईरानी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि ईरान के उठाए गए कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के पूरी तरह अनुरूप हैं।
  • इनका मकसद केवल अपनी सुरक्षा की रक्षा करना और हमलावरों को जलमार्ग का दुरुपयोग करने से रोकना है।

ईरान ने चीन को बताया कि उसने इजराइल की हवाई रक्षा प्रणाली को भेदते हुए खैबर शिकन, इमाद और सेज्जिल मिसाइलें तथा कमीकाजे ड्रोन्स का इस्तेमाल किया। इन हमलों में तेल अवीव के उत्तरी और मध्य हिस्से, रामत गन और नेगेव क्षेत्र में खुफिया ठिकानों, सैन्य, वाणिज्यिक और सहायता केंद्रों को निशाना बनाया गया।

ट्रंप की युद्धविराम योजना और ईरान का कड़ा रुख

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध खत्म करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने 15 सूत्रीय
  • युद्धविराम योजना की पेशकश की, जो पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को भेजी गई।
  • पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की पेशकश भी की है।

ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत “उत्पादक” रही है, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई। इसके बजाय ईरान ने अपना सख्त रुख बनाए रखा है – पछतावा और मकसद पूरे होने तक हमले जारी रहेंगे

  • इस बीच अमेरिका अपनी सेना मजबूत कर रहा है। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से
  • कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी है
  • ताकि मौजूदा 50,000 सैनिकों को और बल मिल सके।

क्षेत्रीय अस्थिरता और होर्मुज का खतरा

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
  • ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजराइल की कार्रवाइयां इस क्षेत्र को अस्थिर कर रही हैं।
  • अगर तनाव बढ़ता रहा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है
  • तेल की कीमतें बढ़ना, व्यापार प्रभावित होना और मुद्रास्फीति का खतरा।

चीन, जो ईरान का प्रमुख आर्थिक साझेदार है, इस बातचीत में ईरान की चिंताओं को सुना। हालांकि चीन की ओर से कोई स्पष्ट बयान अभी सामने नहीं आया, लेकिन बीजिंग पहले भी क्षेत्र में शांति की अपील कर चुका है।

ईरान-इजराइल- अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि

  • यह तनाव कई दिनों से चल रहा है। ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है
  • जबकि इजराइल और अमेरिका ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं।
  • ईरान इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा बता रहा है, वहीं अमेरिका-इजराइल इसे “आत्मरक्षा” का नाम दे रहे हैं।
  • पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश से कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन ईरान का
  • पछतावा तक नहीं रुकेंगे” वाला बयान दिखाता है कि फिलहाल युद्धविराम दूर की बात लग रही है।

वैश्विक प्रभाव और आगे क्या?

  • तेल बाजार: होर्मुज में कोई भी अशांति तेल की कीमतों को आसमान छुआ सकती है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा: सऊदी अरब, UAE जैसे देश भी चिंतित हैं।
  • चीन की भूमिका: चीन ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन दे सकता है, जो अमेरिका के लिए नई चुनौती बन सकता है।
  • भारत पर असर: भारत दोनों तरफ के साथ अच्छे संबंध रखता है।
  • तेल आयात और क्षेत्रीय स्थिरता भारत के हित में है।

ईरान का चीन को दिया गया यह संदेश साफ संकेत है कि तेहरान अकेला नहीं लड़ रहा। अब देखना होगा कि अमेरिका और इजराइल अपना रुख बदलते हैं या तनाव और बढ़ता है।

निष्कर्ष ईरान ने चीन के साथ फोन पर बात करके अपनी “युद्ध की डेडलाइन” साफ कर दी है – अमेरिका और इजराइल को पछतावा होने तक हमले जारी। ट्रंप की युद्धविराम योजना और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। पश्चिम एशिया का यह संघर्ष न सिर्फ क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

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