Gold Silver Price : फरवरी 2026 की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है। पिछले कई महीनों की रिकॉर्ड रैली के बाद अचानक भारी बिकवाली हुई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को चांदी की कीमत 30% तक गिर गई, जबकि सोना लगभग 10% लुढ़का। लेकिन प्रमुख विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट अल्पकालिक है और लंबे समय में कीमती धातुओं में मजबूत अपील बनी रहेगी। आइए जानते हैं पूरी कहानी, कारण और भविष्य का आउटलुक।
सोना-चांदी की रैली का बैकग्राउंड
2025 में सोने की कीमतें 65% और चांदी की 150% तक बढ़ीं। जनवरी 2026 में यह रैली और तेज हुई, सोना $5,600 प्रति औंस से ऊपर और चांदी $120 तक पहुंच गई। यह वृद्धि कई कारकों से हुई: भू-राजनीतिक तनाव (अमेरिका-ईरान, रूस-यूक्रेन, वेनेजुएला), अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, ट्रंप प्रशासन में फेड की स्वतंत्रता पर चिंताएं, ब्याज दर कटौती की उम्मीद और टैरिफ नीतियां। निवेशक सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश (safe-haven) मानकर खरीद रहे थे।

गिरावट के मुख्य कारण
ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के रूप में केविन वार्श को नामित किया। वार्श को हॉकिश (कड़े मौद्रिक नीति वाले) माना जाता है, जो ब्याज दरों में आक्रामक कटौती के खिलाफ हैं। इससे ब्याज दर कटौती की संभावना कम हुई, जो सोने-चांदी की कीमतों को बढ़ाती है।
- अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ: वार्श की नियुक्ति के बाद डॉलर में उछाल आया, जिससे डॉलर में कीमत वाली धातुएं महंगी हो गईं।
- ओवरबॉट स्थिति और प्रॉफिट बुकिंग: कीमतें बहुत तेजी से बढ़ीं, बाजार “क्राउडेड ट्रेड” बन गया। निवेशक मुनाफा वसूलने लगे।
- तकनीकी अस्थिरता: कुछ विश्लेषकों ने इसे “ब्रिक वॉल” से टकराव बताया, जहां तेज रैली के बाद सुधार जरूरी होता है।
- अन्य कारक: चीनी स्पेकुलेटर्स की बिकवाली, मार्जिन कॉल और वैश्विक बाजारों में डी-लिवरेजिंग।
शुक्रवार को चांदी 30% गिरकर $120 से नीचे आई, सोना 10% गिरा। सोमवार को भी गिरावट जारी रही, सोना $4,651 और चांदी $76.92 पर थी, लेकिन बाद में कुछ रिकवरी दिखी।
विश्लेषक क्यों कह रहे हैं “चिंता न करें”?
विश्लेषक इस गिरावट को अस्थायी सुधार मान रहे हैं, न कि लंबी गिरावट की शुरुआत। मुख्य कारण:
- जेपी मॉर्गन: सोने पर सकारात्मक, वर्षांत पूर्वानुमान $6,300 तक बढ़ाया। कहा,
- “लंबी रैली रैखिक नहीं होती, अब पचाते हैं, रीसेट करते हैं और दोहराते हैं।”
- डॉयचे बैंक (माइकल हसुए): वर्षांत $6,000 पूर्वानुमान बरकरार। “टिकाऊ उलटफेर की स्थितियां नहीं, अस्थिरता दोषी है।”
- सुकडेन फाइनेंशियल: कीमती धातुओं में लंबी अपील बाकी, निकट भविष्य में मामूली वसूली संभव।
- समको सिक्योरिटीज (अपूर्वा शेठ): गिरावट स्वस्थ है, जो आशावाद को ठंडा कर
- भविष्य में मजबूत वृद्धि के लिए मंच तैयार करती है।
- सीएमसी मार्केट्स (क्रिस्टोफर फोर्ब्स): सोना अस्थिर रहेगा, लेकिन लंबी अवधि में बुलिश।
विश्लेषकों का मत है कि थीमैटिक ड्राइवर्स (भू-राजनीतिक जोखिम, मुद्रा अवमूल्यन, सरकारी कर्ज) बने हुए हैं। गिरावट ओवरबॉट मार्केट का सुधार है, न कि फंडामेंटल बदलाव।
भारत में सोना-चांदी का असर
- भारत में भी MCX पर सोना ₹1,55,000 के आसपास और चांदी में भारी गिरावट देखी गई।
- बजट 2026 में आयात शुल्क में कोई बदलाव न होने से भी बाजार प्रभावित हुआ।
- निवेशकों को सलाह है कि डिप में खरीदारी से पहले अस्थिरता का इंतजार करें।
और भविष्य की संभावनाएं!
यह गिरावट 1980 के बाद की सबसे बड़ी सिंगल-डे गिरावट में से एक थी, लेकिन विश्लेषक लंबी रैली की उम्मीद बरकरार रखे हुए हैं। अगर डॉलर कमजोर होता है या वार्श की नीतियां डोविश निकलती हैं, तो रिकवरी तेज हो सकती है। सोना-चांदी अभी भी सुरक्षित निवेश बने रहेंगे, खासकर अनिश्चित वैश्विक माहौल में।
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