Farooq Abdullah : जम्मू-कश्मीर की राजनीति और धार्मिक परंपराओं के बीच एक अहम खबर सामने आई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने श्रीनगर स्थित प्रसिद्ध हजरतबल दरगाह में रमजान के आखिरी शुक्रवार यानी अलविदा जुम्मा की नमाज अदा की। इस दौरान उन्होंने लोगों से शांति और एकता की अपील की तथा कहा कि दुनिया में अल्लाह से बड़ी कोई ताकत नहीं है।
यह नमाज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिन पहले जम्मू में एक कार्यक्रम के दौरान उन पर कथित रूप से फायरिंग की कोशिश की गई थी। इस घटना के बाद उनकी यह पहली बड़ी सार्वजनिक धार्मिक उपस्थिति थी।

हजरतबल दरगाह में अदा की अलविदा जुम्मा की नमाज
रमजान के पवित्र महीने का आखिरी शुक्रवार मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसे अलविदा जुम्मा कहा जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों और दरगाहों में इकट्ठा होकर नमाज अदा करते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं।
- श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में भी इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु नमाज पढ़ने पहुंचे।
- यह दरगाह कश्मीर की सबसे पवित्र इस्लामी धार्मिक स्थलों में से एक मानी जाती है
- और यहां बड़ी संख्या में लोग दुआ मांगने आते हैं।
- फारूक अब्दुल्ला ने भी इस अवसर पर दरगाह पहुंचकर नमाज अदा
- की और लोगों से शांति और भाईचारे की अपील की।
“अल्लाह से बड़ी कोई ताकत नहीं” – फारूक अब्दुल्ला
नमाज के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इंसान को हमेशा ईश्वर को याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी ताकत अल्लाह से बड़ी नहीं है और वही सब कुछ नियंत्रित करता है।
- उन्होंने अपनी जान बचने को भी अल्लाह की मेहरबानी बताया।
- कुछ दिन पहले जम्मू में एक शादी समारोह से लौटते समय उनके पास एक
- व्यक्ति ने पिस्तौल से फायरिंग की कोशिश की थी, लेकिन गोली चूक गई और सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को पकड़ लिया।
- इस घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इंसान को हमेशा ईश्वर पर
- भरोसा रखना चाहिए क्योंकि वही हमारी रक्षा करता है।
फायरिंग की घटना पर भी बोले
- फारूक अब्दुल्ला ने उस फायरिंग की घटना को लेकर चिंता भी जताई।
- उन्होंने कहा कि देश में नफरत फैलाने वाली ताकतें बढ़ रही हैं
- और इस तरह की घटनाओं की गंभीर जांच होनी चाहिए।
- उनके बेटे और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए
- इसे हत्या का प्रयास करार दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।
कश्मीर में अलविदा जुम्मा का महत्व
कश्मीर में रमजान के महीने के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है। अलविदा जुम्मा के दिन बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों और दरगाहों में नमाज अदा करते हैं।
श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में इस दिन हजारों लोग एकत्रित होते हैं और पूरे इलाके में धार्मिक माहौल देखने को मिलता है। कई धार्मिक विद्वान इस दिन शांति, भाईचारे और समाज में सद्भाव बनाए रखने का संदेश देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी जताई चिंता
- फारूक अब्दुल्ला ने वैश्विक हालात पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते
- युद्ध और तनाव से आम लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है।
- उन्होंने दुआ की कि दुनिया में शांति कायम हो और युद्ध जल्द खत्म हो।
- उनका मानना है कि युद्ध से केवल नुकसान होता है और इसका असर पूरी
- दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
फारूक अब्दुल्ला का हजरतबल दरगाह में अलविदा जुम्मा की नमाज अदा करना कश्मीर की धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में हुई फायरिंग की घटना के बाद उनका सार्वजनिक रूप से सामने आना और लोगों को शांति का संदेश देना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
उन्होंने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि इंसान को हमेशा ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए और समाज में नफरत की जगह शांति और भाईचारा कायम रखना चाहिए।
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