बिहार सरकार योजना : बिहार सरकार की मुख्यमंत्री बालिका (इंटरमीडिएट) प्रोत्साहन योजना के तहत 2025 में 12वीं (इंटरमीडिएट) पास करने वाली अविवाहित छात्राओं को 25,000 रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों को उच्च शिक्षा (ग्रेजुएशन या अन्य कोर्स) में आगे बढ़ने के लिए आर्थिक मदद देना और उन्हें सशक्त बनाना है। लेकिन अब समस्या यह है कि राज्य भर में 65,000 ऐसी बेटियां हैं जिन्हें हेडमास्टर और स्कूल प्रिंसिपल नहीं खोज पा रहे हैं। इन लड़कियों का रजिस्ट्रेशन अभी तक पूरा नहीं हो सका, जिससे राशि ट्रांसफर में देरी हो रही है। शिक्षा विभाग ने हेडमास्टर्स को दो अतिरिक्त दिन का समय दिया है ताकि वे इन बेटियों से संपर्क कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकें।
योजना की मुख्य विशेषताएं और पात्रता
यह योजना मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का हिस्सा है, जो बिहार सरकार द्वारा बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही है। मुख्य पॉइंट्स:

- राशि: 25,000 रुपये (एकमुश्त, डायरेक्ट बैंक अकाउंट में)
- पात्रता: बिहार बोर्ड या मान्यता प्राप्त बोर्ड से 2025 में इंटर पास करने वाली अविवाहित छात्राएं, जो नियमित स्कूल की छात्रा रही हों।
- उद्देश्य: उच्च शिक्षा में दाखिला लेने, किताबें-फीस, हॉस्टल आदि खर्चों में मदद।
- इससे बाल विवाह रोकने और लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलती है।
- रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: स्कूल हेडमास्टर/प्रिंसिपल द्वारा छात्रा के मोबाइल नंबर और एड्रेस (इंटर एग्जाम फॉर्म भरते समय दिए गए) से संपर्क कर medhasoft.bihar.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है।
क्यों नहीं खोज पा रहे हेडमास्टर?
- हेडमास्टर्स की मुख्य शिकायत है कि इंटर परीक्षा फॉर्म भरते समय दिए गए
- मोबाइल नंबर पर कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा।
- कई नंबर स्विच ऑफ, गलत या बदल चुके हैं। कुछ छात्राओं के एड्रेस पुराने या दूरस्थ गांवों में हैं
- जहां पहुंचना मुश्किल है। मुजफ्फरपुर जिले में ही 2,670 लड़कियां (जिनमें 838 SC-ST कैटेगरी की)
- अनरजिस्टर्ड हैं, जबकि कुल 26,904 पात्र हैं। अन्य जिले जैसे मधेपुरा, बांका, वैशाली में सबसे ज्यादा संख्या है।
- कुछ स्कूलों में 20-35% लड़कियां अभी भी पेंडिंग हैं। मैट्रिक पास लड़कियों में भी 20% से ज्यादा अनरजिस्टर्ड हैं।
- DEO कुमार अरविंद सिन्हा ने कहा, “यह राशि बेटियों को आगे पढ़ाई में मदद के लिए दी जाती है।
- अगर वे नियमित छात्रा थीं, तो उनका घर स्कूल के आसपास होना चाहिए। हेडमास्टर की जिम्मेदारी है
- कि वे उन्हें खोजें।” DPO लेखा योजना अलका सहाय ने भी प्रिंसिपल्स को निर्देश दिए हैं कि लगातार प्रयास करें।
जिलों में स्थिति और उदाहरण
- मुजफ्फरपुर: 2,670+ अनरजिस्टर्ड
- रमेश्वर महाविद्यालय: 48 में से 8 अनरजिस्टर्ड
- SRP S कॉलेज: 11 अनरजिस्टर्ड कई स्कूलों में 80% रजिस्ट्रेशन हो चुका है, लेकिन बाकी पर फोकस जरूरी है।
भविष्य में क्या करें?
यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई 2025 इंटर पास लड़की है, तो तुरंत स्कूल से संपर्क करें। हेडमास्टर को मोबाइल/एड्रेस अपडेट दें और रजिस्ट्रेशन करवाएं। पोर्टल medhasoft.bihar.gov.in पर चेक करें। समय पर रजिस्ट्रेशन न होने से 25,000 रुपये का लाभ छूट सकता है। यह योजना बिहार की बेटियों के लिए बड़ा अवसर है
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