बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 : बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शिवेश राम ने उस समय सभी को चौंका दिया जब वे पहली वरीयता के वोटों में पीछे रहने के बावजूद दूसरी वरीयता की गिनती में जीत हासिल करने में सफल रहे। यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) शुरुआती गिनती में आगे चल रहे थे।
इस चुनाव के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि राज्यसभा चुनावों में केवल पहली वरीयता के वोट ही नहीं बल्कि दूसरी वरीयता के वोट भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राज्यसभा चुनाव में कैसे तय होता है जीत का गणित
- राज्यसभा चुनाव में जीत का फैसला एक खास गणितीय प्रक्रिया से होता है
- जिसे कोटा सिस्टम कहा जाता है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं
- और इस चुनाव में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
इस गणना के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों का समर्थन चाहिए था। लेकिन मतदान के दौरान कांग्रेस और आरजेडी के चार विधायक अनुपस्थित रहे, जिससे कुल वोटों की संख्या घटकर 239 हो गई। इसके बाद जीत का कोटा भी घटकर लगभग 40 वोट रह गया।
पहली वरीयता के वोटों में क्या रहा परिणाम
- पहले राउंड की गिनती में RJD उम्मीदवार एडी सिंह को 37 विधायकों का समर्थन मिला, यानी उन्हें 3700 वोट मिले।
- वहीं BJP उम्मीदवार शिवेश राम को केवल 30 विधायकों का समर्थन मिला, जिससे उन्हें 3000 वोट मिले।
- इस तरह पहली वरीयता की गिनती में शिवेश राम लगभग 700 वोट पीछे चल रहे थे।
- उस समय ऐसा लग रहा था कि एडी सिंह आसानी से यह सीट जीत जाएंगे।
दूसरी वरीयता के वोटों ने पलट दी पूरी बाजी
- राज्यसभा चुनाव में जब कोई उम्मीदवार कोटा तक नहीं पहुंच पाता, तो दूसरी
- वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाती है। यही वह चरण था जिसने पूरे चुनाव का परिणाम बदल दिया।
- एनडीए गठबंधन ने पहले से रणनीति बनाकर अपने कई विधायकों को
- शिवेश राम को दूसरी वरीयता का वोट देने के निर्देश दिए थे।
जब दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती हुई, तो कई विधायकों के वोट शिवेश राम के खाते में जुड़ते गए और धीरे-धीरे उनका कुल वोट बढ़कर 4002 तक पहुंच गया।
जबकि जीत के लिए जरूरी कोटा 3984 वोट था। इस तरह शिवेश राम ने एडी सिंह को लगभग 302 वोटों से हरा दिया।
एनडीए की रणनीति ने दिलाई जीत
- इस चुनाव में एनडीए की रणनीति बेहद सटीक मानी जा रही है।
- गठबंधन के अन्य उम्मीदवारों को पहली वरीयता के वोट दिलवाने के बाद
- उनके समर्थक विधायकों से दूसरी वरीयता का वोट शिवेश राम को दिलवाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही रणनीति शिवेश राम की जीत का सबसे बड़ा कारण बनी। यदि विपक्ष के सभी विधायक मतदान करते, तो परिणाम अलग हो सकता था।
विपक्ष के चार विधायकों की अनुपस्थिति बनी बड़ा कारण
- राज्यसभा चुनाव में विपक्ष के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कांग्रेस
- के तीन और आरजेडी के एक विधायक मतदान के समय उपस्थित नहीं हुए।
- इन चार विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्ष की गणित को कमजोर कर दिया
- और इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। कई रिपोर्टों में बताया गया
- कि इसी वजह से विपक्ष की जीत की संभावना कम हो गई।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
शिवेश राम की इस अप्रत्याशित जीत के बाद बिहार की राजनीति में काफी हलचल देखने को मिली। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया और रणनीति को लेकर कई सवाल उठाए, जबकि एनडीए ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव आने वाले समय में बिहार की राजनीति के समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में आखिरी पल तक कुछ भी संभव है। पहली वरीयता के वोटों में पीछे रहने के बावजूद शिवेश राम ने दूसरी वरीयता के वोटों की मदद से जीत हासिल कर एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।
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